Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

माँ Mother

0
16 -Jan-2021 Parmanand kumar Mothers Day Poem 0 Comments  138 Views
Parmanand kumar

Happy mother's Day !

माँ

माँ, तुम जननी
स्वर्ग सुख हो!
गंगा से भी पावन हो!
रक्त स्रोत हो;
संतानो का,
तुम ही जीवन सागर हो!
समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत
देव प्रिय रहा है! किंतु,
परिवार मंथन से प्राप्त विष,
सहर्ष तुमने स्वीकारा है!
तुम गांधारी, तुम्ही हो कुंती,
कितने घाव सही हो!
कितनी रही विवशता तुमको?
भूखे तुम ,कई _कई रात सोई हो!
कितने युद्ध _महायुद्ध ;
तुमने महाभारत जैसी सही हो!
पिता जैसे महान हस्ती को
जग से जाते देखी हो!
इतनी सहजता से सह जाती,
जैसे तुम धरती माँ हो!
मैं नहीं सिख पाया तुमसे
ये सहनशीलता का गुण!
पिता रोज समझाते थे,
अभी तक रह गया,
मुझमें ये अवगुण!
कोशिश करता हूँ, सिखने की
पता नहीं कब सीखूँगा?
इस धरा पर या उस अंबर पर
कह पाना मुश्किल है!
हे माते तू श्रेष्ठ! समझ,
अपने बेटे की विवशता,
पुत्र सदा रहूँ, मैं तेरा
करता हूँ ,ये अभिलाषा!
self created:---Parmanand Roy

माँ             Mother


 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017