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‘माँ’ तेरी लोरियाँ

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13 -Sep-2019 Mothers Day Poem 0 Comments  321 Views
‘माँ’ तेरी लोरियाँ

माँ वो तेरी लोरियाँ
तेरी थपकियाँ भी याद हैं
करूणा वो तेरी, ममता वो तेरी
तेरा प्रेम जो अगाथ है

हो मुश्किलों कितनी भी चाहें
आधियाँ जितनी चलें
बचपने में माथे का टीका
आज भी मेरे साथ है

कागज के टुकड़े जोड़ने में
मैं दूर तुमसे हो गया
क्या कहूँ इन दूरियों में
क्या-क्या ना मेरा खो गया

चीर निद्रा से जुड़ी तुम
छोड़कर मुझको गई
उस विधाता ने दिया था
‘माँ’ तुम मेरी उपहार थी

इस जनम तुम माँ थी मेरी
अगले जनम भी माँ बनो
जितने जनम मुझको मिले
बस यही मेरी ‘माँ’ मिले

‘माँ’ वो तेरी लोरियाँ
तेरी थपकियाँ भी याद हैं
करूणा वो तेरी, ममता वो मेरी
तेरा प्रेम तो अगाध है



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