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माँ तो है बस माँ

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01 -Dec-2018 Abbas Bohari Family Poems 0 Comments  217 Views
Abbas Bohari

माँ निभाती कर्म बस यही उसका धर्म
आओ दिखलाऊ उसके हृदय का मर्म

बड़े नाज़ो अंदाज़ में पली बाबुल के घर
बनी रही राजकुमारी भले थे दो ही ज़र

चली आ रही सदियोंसे बनी अजीब रीत
करने उजियारा चली बसाए दिलमे प्रीत

पूरे परिवार माँ के समान नही कोई नेक
त्याग कर सारे सुख दिखाती रूप अनेक

पतिकी वज़ीर बेटेकी गुरु बेटीकी सखी
घरकी अन्नपूर्णा श्रमही तेरे भाग लिखी

स्नेह और परोपकार की है माँ जागृत मूरत
ईश्वर की आराधना निहारु जो तेरी सूरत

खुश नसीब है जिसे मिला माँ का साया
नर्क है ठिकाना जिसने माँ को सताया

सुत सुता एक समान जलाए ज्ञानके दीप
माँ की संतान करके प्रदीप्त आए समीप

माँ अब्बास बैठा कदमोंमे लिए दिल साफ़
पायेगा स्वर्ग धरतीपर जो कर दे दूध माफ़



Dedicated to
Jenab

Dedication Summary
Being a single parent to her Son, she has done immensely great job dedicating her life for his education and well being, sacrificing all the pleasures of life for herself!

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