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Maa Tum bhi na Kamal Karti Ho

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24 -Jul-2020 Naqvi Raza Abid Mothers Day Poem 0 Comments  606 Views
Maa Tum bhi na Kamal Karti Ho

दिन भर हमारे लिए ख़ुद को निढाल करती हो,
मां, तुम भी ना, कमाल करती हो

स्कूल ना जाने के लिए मेरे बहाने झेलना,
पापा के लिए सुबह की चाय उड़ेलना
एक ही वक्त़ में सबको कैसे ख़ुश करती हो
मां, तुम भी ना, कमाल करती हो।
_

अच्छा दिखता हूं कि नहीं इसका तुम्हें ख़्याल है,
पर तुम्हें नज़रअंदाज़ करना, इसका तुमको मलाल है
फिर भी मुझ पर वक्त़ जाया करती हो
मां, तुम भी ना, कमाल करती हो
_

मुझे परेशानी हो तो बेचैन हो जाती हो ,
मेरे ना बताने पर डांट भी लगाती हो,
अपने गु़स्से में भी तुम प्यार कैसे दिखाती हो
मां, तुम भी ना, कमाल करती हो।
_

सिर्फ 2 रुपए चुराने पर तुमसे मार खाई थी,
पर मेरी नज़र में तो जिंदगी की सीख पाई थी,
मेरे लिए क्या अच्छा क्या बुरा कैसे जान लेती हो?
मां, तुम भी ना, कमाल करती हो
_

पापा से बहुत प्यार है लेकिन मां तो मां होती है,
सारे घर की रौनक़ और बच्चों की जान होती है,
"लेकिन पापा मुझसे पहले हैं", मोहब्बत इतनी निस्वार्थ करती हो।
मां, तुम भी ना, कमाल करती हो।
_

अकेला है आबिद पर तेरी निगाह साथ चलती है,
कुछ ग़लत ना हो इसलिए तेरी दुआ साथ चलती है,
मुल्कों का फ़ासला पल भर में पार करती हो
मां, तुम भी ना, कमाल करती हो।।



Dedicated to
My Mother

Dedication Summary
You don't need a reason to dedicate something to your mother. She deserves it.

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