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मैं बेजुबान परिंदा पढ़ तु नयनों का लेखन

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06 -Sep-2019 Bijendra Aehsas Sad Poems 0 Comments  565 Views
Bijendra Aehsas

%%मैं बेजुबान परिंदा पढ़ तु नयनों का लेखन%%
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तुझे देख मेरी सुबह होती
देख तुझे ही है मेरे दिन ढ़लता।
मेरी तुझसे हैं रौनक दुनिया
तुझे देख ही है मेरे सांसे चलता।
कैसे तुझ बिन रह पाऊंं
जिय पाऊं... कि मर पाऊं
ये बात बयां न कर पाऊं
मैं बेजुबान परिंदा पढ तु नयनों का लेखन ये रे....
रो रहा है छुप-छुप कर देख न मेरा मन ये रे......
सजा रखा है सपने
बहुत से दिल के अपने कोने मेंं।
अचक-अचक के जागे
देखुंं खोना दु तुझे सोने में।
पत्थर दिल पर रख कर भी रोता
मैं एक बात तुझे बताता हूं।
अगर न मिले तो कलेजा बाहर आ जाये
इतना प्यार जताता हूं।
अंग-अंग कि कंपन तुही तो दिल धडकन ये रे......
रो रहा है छुप-छुप कर देख न मेरा मन ये रे......
मैं बेजुबान परिंदा पढ तु नयनों का लेखन ये रे....
चोट मुझे तू न देना
मैं दर्द सह न पाऊंगा।
कर गई बेवफाई तो
मैं जीते जिय मर जाऊंगा।
फुर्सत मे हो तो कभी
एक दर्द मेरा उठा लेना।
तुझे मिल जाये तेरे सवालों कि
जबाब तो फिर गले लगा लेना।
हा हैं प्यार-हकीकत न सपना झुठा आनन-फानन ये रे.....
मैं बेजुबान परिंदा पढ तु नयनों का लेखन ये रे....
रो रहा है छुप-छुप कर देख न मेरा मन ये रे......
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---©®युवा कवि : विजेन्द्र एहसास
(बागी बलिया, उत्तर प्रदेश)
मोबा. : +91-9205143324



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