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मैं एक ऐसा शख़्स हूं

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11 -Jan-2020 Sunil Life Poem 0 Comments  82 Views
मैं एक ऐसा शख़्स हूं

मैं एक ऐसा शख़्स हूं।
जिसकी मुश्किलें ख़त्म नहीं होती,
और चाहतों की जगह नहीं है।

मैं एक ऐसा शख़्स हूं।
जो दोस्ती के काबिल है,
पर चाहने वाले नहीं।

अपनी जरूरतों को जेब में लिए,
एक अनजानी राह पर खड़ा हूं।
मैं एक ऐसा शख़्स हूं।
जिसकी आदतें उसकी तरह ही
थोड़ी-सी अड़ियल हैं।

है शब्द कहने को बहुत,
पर अल्फाजों का साथ नहीं।
मैं एक ऐसा शख्स हूं।
जो सितारों से परे है,
उस चांद के नूर के लिए।

मैं एक ऐसा शख्स हूं।
जो अंधेरे में रहता है,
रोशनी को चुराने के लिए।

“रोशनी” जिसकी झलक,
एक प्यार के गीत-सा है।
मदहोशी भरे संगीत-सा है।

मैं एक ऐसा शख्स हूं।
जो ऋतुओं से सरवते छुपाता है।
जो ख्वाबों में एक हकीकत सजाता है।
जिसकी बातें एक चुभन-सी हैं।
पर परिणाम दिल जीत जाता है।

मैं एक ऐसा शख़्स हूं।
जो दर्द में भी मुस्कुराता है।
अपने बहुत है कहने को,
पर सच्चाई कुछ और ही बताता है।
बातें जो आती नहीं हर किसी के सामने,
पर जिससे कहनी है, वो
हर वक़्त मुंह फेर जाता है।

“हां" मैं एक ऐसा शख़्स हूं।
जिसकी मुश्किलें ख़त्म नहीं होती,
और चाहतों की जगह नहीं।।



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