Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मैं हूँ पर्वत

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Main Hoon Parvat : Here is the best and latest hindi poem on mountain or parvat. This poem describe the benefits or advantages of various mountains like Mount Everest, K-2 etc. on their nearby areas. Mountain act as a natural boundary which protect a country from outsiders.

12 -Dec-2017 Akshunya Nature Poem 1 Comments  8,419 Views
Akshunya

मैं हूँ पर्वत, मैं हूँ प्रहरी, मुझ पर पड़ती धूप सुनहरी।
कल-कल करती नदियाँ खेलें, हिम भी करती यहाँ ठिठोली।

कहीं सीयाचिन, कहीं कारगिल, सिखलाते;
वीर बनो तुम और बनो शेर दिल।

हिम का आंचल ओढे, बना हिमाचल;
अरुण के स्वागत से बना अरुणाचल।
एवरेस्ट, के-2 मेरे शिखर हैं;
इनको चढ़ने के लिए पर्वतारोही प्रखर हैं।

जैसे माँ करती शिशु को पोषित,
कुछ लोग करते बूढ़ी माँ को शोषित;
ऐसा ही मेरा हाल किया है, जी भर कर मुझे शोषित किया है।
चारों ओर है धुआं- धुआं, सांस लेना भी गुनाह हुआ ।

कहीं प्लास्टिक की थैली, कहीं बोतल, कहीं कूड़े की ढेरी,
सारा जहाँ काला-काला हुआ; मेरा हाल-बेहाल हुआ।

हिम मेरी रो रही, मोम जैसी पिघल रही।
यारों अब कुछ तो सोचो, ऐसे न तुम आंखें मीचो।
गर पर्वत और हिम न बचे, तो तुम भी न बच पाओगे।
जिंदगी के मज़े न ले पाओगे।



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1 More responses

  • poemocean logo
    Moti sah (Guest)
    Commented on 22-May-2018

    Very nice and good poem. Thank you so much.

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