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मैं किसी वियावां में नहीं हूँ

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01 -Apr-2018 Vikram Miscellaneous Poems 0 Comments  755 Views
मैं किसी वियावां में नहीं हूँ

मैं किसी वियावां में नहीं हूँ

मैं किसी वियावां में नहीं अपने कमरे में हूँ
खिड़की से देख रहा हूँ
दूर की बस्ती के घर मकां
एक दरम्याने कद का पेड़
और उस पर फूल लाल रंग के
ठहरा हुआ सा सब
पर एक चिडिया के चहकने की आवाज़
सुनी है मैंने अभी अभी
और मैं सोच रहा हूँ
जो एक मौसम है बाहर
अपने अंदर समा सकूं
और एक कविता से
जुंबिश पैदा करूँ इस सबमें
चिडिया से भी ज्यादा
कि मैं भी हूँ यहाँ ।

विक्रम गथानिया



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