Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मै पानी हूँ.।

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विनोद सिन्हा-

पानी के महत्व एवं जल संरक्षण संदेश को शब्दों के रूप में ढालने की एक छोटी सी कोशिश.।

मैं पानी हूँ.।

मैं पानी हूँ..।
मैं स्रोत भी हूँ, मैं सार भी हूँ,
सच मानो तो मैं ही संसार हूँ,
धरा तड़पती आलिंगन को मेरे,
मिट्टी चुम्बन को तरसती है.।
झरनें मुझे देख हैं आहें भरतें,
नदियाँ मुझे पा कर उफनतीं हैं ।

मैं पानी हूँ.।

मैं नर में भी हूँ मैं नारायण में भी,
मैं असुर में भी हूँ और मानव में भी,
मैं भक्ति में भी हूँ,मैं शक्ति में भी,

मैं पानी हूँ.।

भर दूँ पुण्य तन मन में जो,
मैं वो भागिरथी हूँ.।
धो दूँ हर पापों को जो,
मैं वो बहती निश्छल गंगा हूँ.।

मैं पानी हूँ.।

मैं सागर का गर्व हूँ,
सूखे खेतों का हर्ष हूँ,
बन बूँदें अगर बरस जाऊँ मैं ऐसे.।
उनके लिए हो कोई इक पर्व जैसे.।

मैं पानी हूँ.।

मैं पेड़ों को भी जीवन देता हूँ,
मैं फूलों को भी जीवन देता हूँ.।
मैं नहरों में,मैं तालाबों में भी,
मैं कुएं में,मैं नलकूपों में भी,
और अगर कहीं जगह नहीं मिले तो,
आँसू बन पलकों को भर जाता हूँ.।
मैं तो कण कण में हीं होता हूँ.।

मैं पानी हूँ.।

मैं क्षय भी हूँ,मैं प्रलय भी हूँ.।
सृष्टि में जीवन धारा की मैं,
कण कण की पुकार हूँ.।
मैं हीं जीवन,मैं ही मृत्यु,
मैं हीं आत्मा,मैं हीं मोक्ष हूँ.।
मैं स्रोत हूँ, मैं संसार हूँ.।

मुझे अभी अगर ना तुम सहेजोगे.।
बूँद बूँद को सभी तरस जाओगे.।
सूखेगा हर पल कंठ तुम्हारा,
और प्यासे हीं सब मर जाओगे.।
प्यासे हीं सब मर जाओगे.।

मैं पानी हूँ.।

मैं पानी हूँ.।

विनोद सिन्हा-"सुदामा"

जल हीं जीवन है,जितना हो सके आज बूँद बूँद बचायें ऐसा ना हो की कल हम सब पछतायें.।



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