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मै टूटी हूं, मगर तुम मजबुर मत समझो

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16 -Sep-2019 Suman Kumari Love Poem 0 Comments  217 Views
मै टूटी हूं, मगर तुम मजबुर मत समझो

मै टूटी हूं, मगर तुम मजबुर मत समझो..
मेरी खामोशी को तुम मेरा गुरूर मत समझो..!

मै अब भी तुझमें शामिल हूं एक रूह कि तरह..
जुदा होकर भी तुझी में हूं तुम दूर मत समझो..!

चमक मुझमें भी रहा करती है दिन के उजाले में..
मै कांच हूं असल में तुम कोहिनूर मत समझो..!

वो गुनाह ही था जो तुमसे ईश्क कर बैठी...
मै गुनहगार हूं तेरा , तुम बेकसूर मत समझो.. !

जिक्र हो जाता है तेरा जब ईश्क की बार होती है...
हां ये ईश्क को मेरा फितूर मत समझो...!



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