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मैंने दिल से कहा..

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16 -Oct-2019 Robin Sad Poems 0 Comments  455 Views
मैंने दिल से कहा..

मैंने दिल से कहा
मत कर याद उसे .. जो तेरा कद्र नहीं करता
पर दिल तो दिल है हर पल उसे याद कर लेता है...

मैंने दिल से कहा
तूने उसके प्यार मे गिरकर एक bloodyfool को नूर ए आफताब बना दिया..
वो चाँद की परछाई के लायक नहीं थी
तूने चाँद का टुकरा कह दिया...

मैंने दिल से कहा
कभी मेरे फोन कॉल के लिस्ट मै उसका No. सबसे ऊपर होता था
अब मेरा no. उसके मोबाइल मै save है कि नहीं ये भी पता नहीं...
कभी उसके कॉल, msg, photo से दिन की शुरुआत होती थी.. Or ख़तम भी...
आज उसकी हज़ारो msg.. सकरो +photo मेरे मोबाइल के किसी कोने मै रेह रेह कर उसकी याद दिलाती है...

मैंने दिल से कहा..
जब वो रात में online रहती थी
ओर वो भी online रहता था
उसे देखकर तुम्हारी अंखे नम हो जाती थी.. फिर भी तू उसके एक reply का wait करता था

मैंने दिल से कहा
जितना उसे समय दिया हू उतना अगर मै अपने दोस्तो को दे देता... आज तू भरी मेहफिल मै अपने आप को तन्हाई महसूस नहीं करता..

.मैंने दिल से कहा
अब कुछ ना रहा तुझे कहना को
मत कर उम्मीद इतनी की दिमाग भी छोर के चला जाए तुझे


मैंने दिल से कहा
उसे भी कही ज्यादा हसी चेहरा है कोई
दिल ने कहा होंगे चेहरा हसी.. पर उसे जादा नहीं है कोई


मैंने दिल से कहा
तू थक गया होगा ना रोजाना धड़क के उसके बारे मै सोच के

अब थोड़ा सा तू रुक जा

दिल ने कहा

अपनी परवाहा नहीं है तुझे
तो कोई बात नहीं
कम से कम एक दफा अपनी दिलरूबा को सोच ले
फिर कोई बात मुझको बता...

मैंने दिल से कहा
उस नूर को जब मैंने पहली दफा देखा तो मेरी अंखे चोंध से गई थी, अब उसपे हमेसा सजदा करने को जी चाहता h

ए दिल मत कर याद उसे.. पर दिल मेरी सुनता कहा है.. बस उसी को याद करता है.. करता है.. करता रेहगा.

Love u



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