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मजदूरों का दर्द एक चेतावनी

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17 -May-2020 निशंक Countryside Poems 0 Comments  559 Views
निशंक

मन द्रवित है मौन हूँ
फिर भी ह्रदय यह बोलता है
रक्त रंजित इन पगों से
महीमण्डल डोलता है
इस व्यथा इस वेदना को
देखकर भी मूक हैं जो
क्यों न उनका रक्त
आंशिक रूप से भी खौलता है
मूढ हैं जो आज फिर से उनको
मैं चेतावनी दूं
ध्यान से सुन लो ऐ 'दिल्ली'
भूकम्प साधारण नहीं है
वस्तुत: ये शेष का फन आज फिर से डोलता है



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