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मालिनी छंद ("हनुमत स्तुति")

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21 -Apr-2021 Naman God Poems 0 Comments  549 Views
Naman

मालिनी छंद ("हनुमत स्तुति")

पवन-तनय प्यारा, अंजनी का दुलारा।
तपन निगल डारा, ठुड्ड टेढ़ा तुम्हारा।।
हनुमत बलवाना, वज्र देही महाना।
सकल गुण निधाना, ज्ञान के हो खजाना।।

जलधि उतर पारा, सीय को खोज डारा।
कनक-नगर जारा, राम का काज सारा।।
अवधपति सहायी, नित्य रामानुयायी।
अतिसय सुखदायी, भक्त को शांतिदायी।।

भुजबल अति भारी, शैल आकार धारी।
दनुज दलन कारी, व्योम के हो विहारी।।
घिर कर जग-माया, घोर संताप पाया।
तव दर प्रभु आया, नाथ दो छत्रछाया।।

सकल जगत त्राता, मुक्ति के हो प्रदाता।
नित गुण तव गाता, आपका रूप भाता।।
भगतन हित कारी, नित्य हो ब्रह्मचारी।
प्रभु शरण तिहारी, चाहता ये पुजारी।।
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मालिनी (लक्षण छंद)

"ननिमयय" गणों में, 'मालिनी' छंद जोड़ें।
यति अठ अरु सप्ता, वर्ण पे आप तोड़ें।।

"ननिमयय" = नगण, नगण, मगण, यगण, यगण।
111 111 22,2 122 122

मालिनी छन्द में प्रत्येक चरण में 15 वर्ण होते हैं और इसमें यति आठवें और सातवें वर्णों के बाद होती है। सुंदर काण्ड का 'अतुलित बलधामं' श्लोक इसी छंद में है।
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया

मालिनी छंद (


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