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Mastari Ke Job Mein

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19 -Jan-2016 Bhola Prasad Mishra Teacher Day Poem 0 Comments  2,150 Views
Mastari Ke Job Mein

मास्टरी के जॉब मे अब कुछ न रह गया.
रह गया जो अपने मतलब का न रह गया.
उच्च शिक्षा,ऊँची डिग्री,लग रही है फिजूल
जैसे कोई प्लॉट सरकारी मिला हो नजूल.
ख्वाब अपना हो के चकनाचूर रह गया.

लद गए दिन मॉस्टरी के,पूछता अब कौन,
किस कदर बिगड़ा है सिस्टम,किससेपूछे कौन.
कहते ट्यूशनखोर मॉस्टर,बनके रह गया.

क्या पढ़ाए,क्या लिखाए,जाए कब स्कूल,
कागजी घोड़े के पीछे,फाँकता है धूल.
कागजों के ढेर मे गुम होके रह गया .

सबकी हाँ मे हाँ मिलाए ,मास्टर मजबूर,
हो गया जो ट्रांस्फरतो घर से जाना पड़ता दूर.
पॉट मे दो मास्टर ये पिसके रह गया.

ना तो श्रद्धा, ना है आदर,करते यूँ हैं प्रणाम,
जैसे हों मक्खी उड़ाते,क्यों, कहे ये अनाम.
एक तमाशा बनके मास्टर अबतो रह गया.



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