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गज़ल " मतलबी रिश्ते निभाते हैं मेरे"

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10 -Jan-2019 Rohit kumar Ambasta Relationship Poems 1 Comments  268 Views
Rohit kumar Ambasta

बर्क दिल पे वो गिराते हैं मेरे
हुश्न से दिल को जलाते हैं मेरे

इश्क ने मशहूर इतना कर दिया
लोग अब किस्से सुनाते हैं मेरे

मुफलिसी का दौर जब से आ गया
आँख अब अपने चुराते हैं मेरे

सामने तो हँस रहे दिल खोल के
खार छुप-छुपके चुभाते हैं मेरे।

कौन किसका कब हुआ 'रोहित' यहाँ
मतलबी रिश्ते निभाते हैं मेरे।

©रोहित कुमार अम्बष्ट
अम्बष्ट निवास, शिव पहाड़,
दुमका(झारखण्ड)
PN-13
Mob No- 7004245439



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1 More responses

  • Piyush Raj
    Piyush Raj (Registered Member)
    Commented on 12-January-2019

    बेहतरीन ग़ज़ल ,शानदार.

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