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मेघ पुष्प और मनुज की वार्तालाप

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21 -Nov-2021 Karan Kumar Nature Poem 0 Comments  61 Views
मेघ पुष्प और मनुज की वार्तालाप

आज तू विकल नहीं है मेरे लिए
क्योंकि मैं विद्यमान हूं इस बेला में
सतत करता है अनुपयुक्त व्यवहार
इक वासर विलापित होगा तू इसके लिए

मत कर इसके साथ तू अनुपयुक्त व्यवहार
नहीं तो तुझसे प्रमान इतना परे हो जाएगा
या फिर तुझसे इतना असंबद्ध हो जाएगा
तू व्यथित होगा पर उपहार नहीं आएगा


उदक एक प्रमान यह प्रश्न उठाएगा
उस काले दुरुपयोग न किया होता
तो मुझे संप्रति यह प्रश्न न करना पड़ता
मेरे लिए तू इतना न व्यथित हुआ होता


तू मेरे विरह में इक वासर खिन्नता होगा
अब क्या होगा ? तेरे संतापित होने से
उस बेला तू विचार-विमर्श किया होता
आज का प्रमान तेरे लिए सुखमय होता

अनागत मे भावी संताने ये
तुमसे प्रश्न पूछेंगीं
कि उदक बिनु इतना कुहराम
क्यों है ? तब तुम उनको
प्रत्युत्तर क्या दोगे ?

कह देना तुम उन भावी पीढ़ियों से
अतीत बेला मे हमें अंतर्बोध जरा होता
उदक सगं ऐसा अनुपयुक्त व्यवहार
कभी ना किया होता तो अच्छा होता

मेघ पुष्प ही प्राण है
यह ज्ञात हमें होता
तो उदक हमसे दूर ना होता

हे मनुष्य आज तुम मुझको संरक्षित कर ले.
मैं मेघ पुष्प अनागत में तेरी भावी संतानों को
प्रकृति के वरदान अनंत से सुरक्षित कर लूंगा
भावी पीढ़ियों के प्रश्नों का उत्तर भी मैं दे दूंगा

- करन कुमार मौर्या ( वेदलम )



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