कुछ यादें - कुछ सपने

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06 -Oct-2017 Sachin Om Gupta Memories Poems 0 Comments  74 Views
कुछ यादें - कुछ सपने

" कुछ यादें - कुछ सपने " १ ." बस वही यादें " यादें एक सरल शब्द है, केवल जहन की बातें या तकलीफें हैं यादें, कुछ बातें, कुछ मुलाकातें और फिर यादें | मिलना और मिल के बिछड़ना , तस्वीरें देख के आँसू का फिसलना और रह जानी हैं तो बस क

फिर पुनर्जन्म..........१

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24 -Sep-2017 Aman Memories Poems 0 Comments  50 Views
फिर पुनर्जन्म..........१

एक दिन शायद मैं चला जाऊ .... ..... दूर कही दूर अनन्ता की ओर इस ज़मी से दूर तेरे आसमा से दूर इस शाहिल से दूर तेरे निशा से दूर पर न मेरे खातिर तू अश्क बहाना मैं लौट आऊगा ,आज नहीं तो कल कल नहीं तो कल शायद कल पर शायद न मेरी ये शक्ल

ये उन दिनों की बात है

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10 -Sep-2017 pankaj taparia Memories Poems 0 Comments  134 Views
ये उन दिनों की बात है

ये उन दिनों की बात है, ये उन दिनों की बात है, समय का पहिया चल रहा है, कम हो रहे सिलसिले, कम हो रही मुलाकात है, ये उन दिनों की बात है । सर्दियों के उन दिनों में हम धूप सेका करते थे, उठने में देर हो गई तो मुँह पे पानी फेंका क

तुम बदल गए

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01 -Sep-2017 rebel Memories Poems 0 Comments  61 Views
तुम बदल गए

पहाडी बादल से तुम, घने देवदार सी मैं, जाने कब, कैसे तुम, घुसपैठ करते गए मन में. तुम्हारा सारे आलम पर छाकर, मेरी सोच को कुंद कर जाना. मगर तुम भी मौसम ही निकले, और फिर तुम्हारा भी बदल जाना. अब तो बस मैं हूं ,और धूल सी तुम्हा

कशमकश

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29 -Aug-2017 rebel Memories Poems 0 Comments  60 Views
कशमकश

अजीब कशमकश में हूं, तुम्हें भुला दूं या सहेज कर रखूं. रखकर भुला दिए गए, लॉकर रूम के लावारिस सामान सी, तुम्हारी तस्वीर मुझे स्टोर रूम तक लाएगी. किताबों के पन्नों में ढुंढुंगी कहीं, मगर सोचूंगी कि खो ही जाती तो कहीं अ

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