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Beete Lamhon Ki Chaadrein

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06 -Sep-2012 Praveen Agarwal Memories Poems 0 Comments  1,753 Views
Praveen Agarwal

मैने बीते लम्हों के ताने-बाने से
यादों की कुछ चादरें बनाई हैं
मौसमों से जूझते दिल को कई बार उढाई हैं

उन चादरों में अब छेद हो गये हैं
रंग भी उनके अब फेड हो गये हैं

आओ.. हम अब एक बार और मिले..
कुछ और लम्हे इक्कटठा करें
इन लम्हों से जो चादरें बनेंगी
आने वाले मौसमों में हम सबको इनकी ज़रूरत पड़ेगी



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