Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

'Ik Ghazal'

0
13 -Feb-2013 Himanshu dubey Memories Poems 1 Comments  1,494 Views
Himanshu dubey

जो कभी अपने थे, अब क्यू हुए बेगाने.
हैं वक़्त की बाते , वक़्त ही बेहतर जाने.

१. जो कलम उठाऊ, और लिखू 'मोहोबत' तो क्या.
वो ना समझेंगे कभी, हैं जो जान के भी अनजाने.
हैं वक़्त की बाते , वक़्त ही बेहतर जाने.

२. दिखेगी फिर रौशनी, ज़रा सा ठहरो अभी.
हमने भेज हैं अपना ख़ुदा, हमारे चाँद को लाने.
हैं वक़्त की बाते , वक़्त ही बेहतर जाने.

३. थाम के हाथ मेरा,चलो नींदों के सेहर मैं.
आओ फिर चलते हैं,चंद ख्वाब सजाने.
हैं वक़्त की बाते , वक़्त ही बेहतर जाने.

४. अक्स हैं तेरा, मना ले उसे फिर से.
रूठा रहा गर वो.तो नस्तर होगे ज़माने.
हैं वक़्त की बाते , वक़्त ही बेहतर जाने. (H.D.)



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

1 More responses

  • poemocean logo
    Shiksha jain (Guest)
    Commented on 14-February-2013

    Bahut khoob yrr ghazlo ki to bt hn nirali hn,,,,..lve dis 1:-).

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017