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Intzaar..

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16 -Oct-2012 deepika manghnani Memories Poems 0 Comments  1,425 Views
deepika manghnani

koi humse puche ye intzaar kya hota he
sapno ke har ek moti se wo apni maala pirota he
bahaa to leta he har koi aansu
par gam me bhi muskuraane ka ahsaas kya hota he
koi humse puche ye intzaar kya hota he



bool jata he har khushi ko uske lie ye tyohaar kya hota he
uske choone ke ahsaas se wo palke bigo deta he
uske sirf saath se wo dunia chod deta he
har raat saal maheene or dino ko ginkar
uske aane ki aas me sota he
koi humse puche ye intzaar kya hota he



uske bina hamara ye haal kya hota he
itna door hoke bi hamari aankho me basa hota he
uski baaho me sone ka ahsaas kya hota he
kabhi kaanto se chubta kabhi phoolo se pyara intzaar ye hota he
koi humse puche is pyaar ke aane ka intzaar kya hota he



इंतज़ार..

कोई हमसे पूछे ये इंतज़ार क्या होता है
सपनों के हर एक मोती से वो अपनी माला पिरोता है
बहा तो लेता है हर कोई आंसू
पर ग़म में भी मुस्कुराने का अहसास क्या होता है
कोई हमसे पूछे ये इंतज़ार क्या होता है



भूल जाता है हर ख़ुशी को उसके लिये ये त्यौहार क्या होता है
उसके छूने के अहसास से वो पलके भीगो देता है
उसके सिर्फ साथ से वो दुनिया छोड़ देता है
हर रात साल महीने और दिनों को गिनकर
उसके आने की आस में सोता है
कोई हमसे पूछे ये इंतज़ार क्या होता है



उसके बिना हमारा ये हाल क्या होता है
इतना दूर होक भी हमारी आँखों में बसा होता है
उसकी बाहों में सोने का अहसास क्या होता है
कभी काँटों से चुभता कभी फूलों से प्यारा इंतज़ार ये होता है
कोई हमसे पूछे इस प्यार के आने का इंतज़ार क्या होता है


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