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Meri Sabse Achchhi Dost

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05 -Sep-2015 Varman Garhwal Memories Poems 0 Comments  1,407 Views
Varman Garhwal

मुझे याद आते हैं वो सारे पल मुझे दिल दिया था तुमने चाय में मिला के

मैं कैसे भूल सकता हूँ ये सब मुझे सुकून मिला था तुम्हारी दोस्ती की छाँव में आके

मेरी जिन्दगी में आई थी तुम बहाना बनाके

मेरी जिन्दगी बन गई तुम मुझे अपना दोस्त कहके

जिन्दगी में पहली बार मेरी आँखें नम हूई थी तुम्हारा दर्द सुनके

मैंने सोचा था एक दिन हर आँशु चुरा लुगाँ तुम्हारी आँखों के

फिर शुरू हूई शुरूवात हमारी दोस्ती के अफसानों की

मुझे भी जीना आ गया तुमसे मिलके

मुझे बहुत खुशी मिलती थी तुमसे बातें करके

बहुत उदास होता था मैं तुम्हें उदास देख के

तुम्हारा ईन्तजार करता था मैं रात भर जाग के

सारा दिन गुजारता था मैं तुम्हें याद करके

मेरी आँखों से अपने-आप आँसु आते थे तुम्हे ना देख के

तुम्हारी बेरूखी से बहुत दु:खी होता था मैं रो-रो के

सामने होकर भी जब तुम नजर-अन्दाज करती थी बहुत रोता था मैं खुद को कोस-कोस के

कुछ दिन बाद जब तुम Sorry बोलती थी मुस्कुरा देता था मैं सारे गम भूलके

कभी-कभी जब तुम Thanks बोलती थी तुम्हें Punishment देता था मुस्कुरा के
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याद आते हैं वो सारे बीते लम्हे मुझे दिल दिया था तुमने चाय में मिला के

कैसे भूल सकता हूँ मैं मुझे सुकून मिला था तुम्हारी दोस्ती की छाँव में आ के

मुझ पर यकिन नहीं किया तुमने मेरी बातों को मजाक समझ के

कुछ काम करते हैं कहीं नाम करते हैं घर से चला मैं ये सोच के

तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त बनना हैं ये मन्जिल तय करके

क्या प्यार करते हो मुझसे बहुत उलझन में डाल दिया तुमने मुझसे ये सवाल पुछ के

एक अन्जान लड़की के लिए क्यों रोते हो क्यों झगड़ते हो मेरे पास जवाब नहीं थे इन सवालों के

मुझे भी पता ना था कौनसी राहैं हैं ये तुमसे ही पुछने लगा मैं मतलब इनके

मैंने पुछा प्यार क्या हैं तुमने कहाँ भगवान हैं बस करो पुजा समझ के

मैंने पुछा प्यार एक ही बार होता हैं तुमने कहाँ फिर इतने दोस्त कैसे बनते हैं

मैंने पुछा क्या प्यार किसी एक से होता हैं तुमने कहाँ फिर मम्मी-पापा भाई-बहिन और दोस्तों से प्यार क्यों करते हैं

मैं सिखता रहा तुमसे तुम्हारा Student बनके

तुम सिखाती रहीं मुझे मेरी Teacher बनके
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मुझे दिल दिया था तुमने चाय में मिला के

मुझे सुकून मिला था तुम्हारी दोस्ती की छाँव में आके

मैं भी सपने देखने लगा एक खुशहाल घर के

जहाँ तुम सुबह-सुबह चाय पिलाए मुझे नींद से जगा के

नाश्ता करवाओ मुझे बहुत प्यार से मुस्कुरा के थोड़ा सा डान्ट के

अॉफिस भेजो मुझे खाना टाइम से खा लेना ये बोल के

शाम को घर जल्दी आना तुम मुझसे कहो ये डान्ट के

लौट कर जब मैं घर को आऊ दरवाजा खोलो तुम मुस्कुरा के

पास बैठकर फिर मुझसे हाल पुछो मेरे पूरे दिन के

मैं हँस-हँस कर बताता रहुँ तुम्हें किस्से अपनी जिन्दगी के

तुमसे पुछू कैसा रहा तुम्हारा सारा दिन हमारे घर के आँगन में

कभी तुम रूठ जाओ मुझसे नाराज होके

मैं मनाता रहूँ तुम्हे कभी हँस के कभी रोके

कभी मैं रूठ जाऊ तुमसे तो मुझे मनाओ तुम हर बार नया नाटक करके

कभी झगड़ा करके कभी डॉन्ट कर मुस्कुरा के

कभी फरमाइश करो तुम मुझ पर अपना हक जता के

कभी गुस्सा करो तुम मुझ पर अपना हक जता के

ऐसी बहुत सारी ख्वाहिशें हैं मेरी जो मैं कभी कह ना सका मजबूर होके

आज भी मेरे पास लफ्ज नहीं हैं कैसे बयान करू बो सब लिख के

दिल की बातें दिल में ही रह गई तुमसे कभी कह ना सका खुल के

मुझे दिल दिया था तुमने चाय में मिला के

मुझे सुकून मिला था तुम्हारी दोस्ती की छाँव में आके

तुम्हें मुझसे महोब्त नहीं हैं चुप हीं रहा मैं हमेशा ये सोच के

तुम किसी और की अमानत हो कुछ नहीं कहाँ मैंने ये सोच के

तुम्हारी खुशियाँ ही तो माँगता था हर दुआ में सर झुका के

तुम्हारा एक प्यारा सा घर ही तो माँगता था ऊपर वाले से दुआ करके

मेरे सारे सपने थे सिर्फ तुम्हारे घर की खुशहाली के

मेरी हर आरजू में यहीं था सारे गम मिट जाए तुम्हारी जिन्दगी के

तुम्हारी आँखों में आँशु आए तो सिर्फ खुशी के

तुम्हे सबसे अच्छे जीवन साथी मिले दुनिया के

तुमसे ही मैंने समझे थे मतलब रिश्तों के

तुमसे ही मैंने जाने थे मायने जिन्दगी के

तुमसे ही हुए मुझे एहसास खुशियों के

तुझमें ही मुझे दर्शन हुए भगवान के

तुम्हारी खुशी ही वजह हैं मेरे मुस्कुराने की

तुम्हारी हँसी ही वजह हैं मेरे जीने की

मेरे सपने हैं तुम्हारे आँगन में नन्ही सी खिलखिलाहट के

कभी रोते हुए तुतलाकर बोलती आवाजों के

कभी घबराकर मचलते हुए नादानियों के

कभी ईठलाकर हँसते हुए मासुम चेहरों के

कभी शरमाकर सिमटते प्यारे चेहरों के

ऐसे बहुत सारे मेरे ख्वाब हैं जो दबे हैं दिल में तुम्हारे दोस्त के

हर बात मैं कह नहीं सकता बस समझ जाओ जज्बात मेरे दिल के

उनके जैसा मैं नहीं हूँ जिनका प्यार पूरा होता हैं किसी को हासिल करके

मेरे प्यार को मन्जिल मिलती हैं तुझे खुश देख के

उनके जैसा मैं नहीं हूँ जो किसी के ना मिलने पर इल्जाम देते है बेवफाई के

मेरी जिन्दगी मुकम्मल होती है तेरे घर की खुशहाली देख के

यहीं एहसास जब मेरे दिल में जाग गए जब मतलब समझाए तुमने प्यार के

यहीं एहसास जागने के बाद मैंने तुम्हें सुनाए थे हाल अपने दिल के

लेकिन तुमने कुछ और मतलब निकाल लिए मेरी बातों के

जिन्दगी में मरने से पहले एक बार मिलने के वादे थे दोस्तों के

लेकिन क्या करें दूनिया में कुछ दूशमन भी हैं सच्ची दोस्ती के

कुछ लोग बरदाशत नहीं कर पाते घर बसते हुए किसी के

ऐसे लोगों के कारण मुझे गलत मत समझना उनकी बातें में आके
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मुझे दिल दिया था तुमने चाय में मिला के

मुझे सुकून मिला था तुम्हारी दोस्ती की छाँव में आके

और क्या-क्या कहूँ कुछ दुनिया में लफ्ज ही नहीं हैं कुछ बातों के

मैं कहना भी चाहूँ तो भी हजारों जिन्दगीयाँ गुजर जाएगी लेकिन फिर भी कम ही होगी
हमारी बातों के लिए

आखिर में फिर वहीं बात कहता हूँ गुजारिश करके

मुझे छौड़ कर मत जाना फिरसे अकैला करके

मैं जो भी लिखता हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए नाम अपनी सबसे अच्छी के

ये मत समझना मैं दुनिया को मेरी और तुम्हारी दास्तान सुनाने के लिए ये बातें सबको बताता हूँ

क्यों कि दूनिया में ऐसा कोई इन्सान हैं ही नहीं जो समझ सके मतलब तुम्हारी और मेरी दोस्ती के

सारी दुनिया में सिर्फ और सिर्फ तुम ही हो जो समझ सकती हो मतलब मेरी बातों के

सिर्फ और सिर्फ तुम ही हो जो समझ सकती हो मेरे जज्बात मेरे दिल के

सबके सामने सिर्फ इसलिए लिखता हूँ अगर कोई किसी लड़की को दोस्त बनाए तो लड़की होने के कारण दोस्ती का गलत फायदा ना ऊठाए

क्यों कि दुनिया में दोस्ती और प्यार से बढ़कर कुछ नहीं होता

लेकिन दुनिया में दोस्ती या तो 2 Boys के बीच में होती हैं
या फिर 2 Girls के बीच में ही अच्छी दोस्ती होती हैं

दुनिया में कहते हैं एक लड़का और एक लड़की कभी सिर्फ दोस्त नहीं रह सकते

मैं ये सब सबके सामने ऐसी सोच वालों के लिए ही लिखता हूँ

वरना तुम्हारी और मेरी दोस्ती लफ्जों में कैसे बयान हो सकती हैं

तुमसे तो सिर्फ एक हीं बात कहनी हैं जो हमेशा कहता हूँ

मुझे भूल मत जाना मेरी सांसें चलती हैं सिर्फ तुम्हारी दोस्ती के साये में

तुम्हारा चाय में मिला कर दिया हुआ तुम्हारा दिल मेरे सीने में धड़कता हैं सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा नाम लेकर



Dedicated to
wahababdul323@gmail.com

Dedication Summary
Maine Ye Poem Apni Sabse Achchhi Dost Ke Liye September 2014 Me Likhi Thi

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