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मेरे बाबा का बक्सा

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18 -Oct-2021 Atul Bhardwaj Grandparents Poems 0 Comments  230 Views
मेरे बाबा का बक्सा

ये बात उस समय की है-
जब आंसू टपकने से पहले दुकान खुल जाते थे,
बस करवट बदलने से पंखे डोल जाते थे।

उसमे रखा कुछ ऐसा मेरा साजो-सामान था,
जिनका मतलब समझना सिर्फ उनके लिए आसान था।

उन्हें रख दूँ कहीं पे ऐसी जगहें अनेक थीं,
पर दुनिया की सबसे महफूज़ जगह सिर्फ एक थी।

उसमे जन्नत तक जाने के रास्तों का नक्शा था,
कोई छोटी मोटी चीज़ नहीं वो मेरे बाबा का बक्सा था।।

---अतुल भारद्वाज---



Dedicated to
My Grandfather

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