Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मेरे दादा जी का गाँव

1
विकास त्रिवेदी 'प्रलय'

बौराई अमिया की डाली,
जगह-जगह फैली हरियाली,
मिट्टी की सोंधी खुश्बू की
बादल करता था रखवाली,
मिलकर हंसी ठिठोली करते
बैठ यहाँ बरगद की छाँव,
मेरे दादा जी का गाँव !!

लालटेन का वो झिलमिल सा उजियारा,
याद है मुझको कीचड़ वाला गलियारा,
नीलगाय घूमा करती थी आवारा,
भरी दुपहरी खूब दौड़ते नंगे पाँव
मेरे दादा जी का गाँव !!

वो पेंडो पर चढ़कर बेर तोड़ लाना,
पापा के डर से कमरे में छिप जाना,
यारो के संग जाकर नहर नहा लेना,
वो चुपके से धरी मिठाई खा लेना,
कभी कभी तो उल्टा पड़ता खुद का दांव,
मेरे दादा जी का गाँव !!

एक दूसरे के धर्मो की ,
मिलकर करते थे रखवाली,
सब त्यौहार मनाते मिलकर,
चाहे ईद हो या दीवाली,
लोगों की मीठी बोली से ,
भर जाते थे दिल के घाव,
मेरे दादा जी का गाँव !!

खुद के खाने से पहले
खाना पाती थी गाय,
सुबह सवेरे लस्सी पीते
नहीं बनाते चाय,
बाहर थी कुत्ते की भौं-भौं,
घर के भीतर म्यांव,
मेरे दादा जी का गाँव !!

बिना पंख के उड़ती रहती
महुए की मदमाती गंध
ककड़ी, खीरा खरबूजे से
दिल का था कोई सम्बन्ध
जिस दिन हो जाती थी बारिश
नहीं छूटती सूखी ठाँव
मेरे दादा जी का गाँव !!

मेरे दादा जी का गाँव


Dedicated to
My Grandfather

Dedication Summary
Because I always missing the village of my grandfather

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5 More responses

  • विकास त्रिवेदी
    Commented on 18-May-2018

    @Ajay Pratap
    आभार मित्र.

  • विकास त्रिवेदी
    Commented on 18-May-2018

    @Ajay Pratap
    बहुत आभार भाई.

  • विकास त्रिवेदी
    Commented on 18-May-2018

    @Ajay Pratap
    बहुत आभार भाई.

  • poemocean logo
    Ajay Pratap (Guest)
    Commented on 18-May-2018

    बहुत शानदार कविता !!.

  • poemocean logo
    Ajay Pratap (Guest)
    Commented on 18-May-2018

    ग्रामीण परिवेश से जुडी शानदार कविता.

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