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मेरे दिल के जज़्बात

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15 -Mar-2021 Ambika Life Poem 2 Comments  169 Views
मेरे दिल के जज़्बात

आज मै तनहाई से गुजर रही हूं आखिर क्यों ?
आज मुझे क्यों वो खुशी नहीं दिख रही जो मेरे सामने है?

किस्मत पर भी कब तक भरोसा करू, जो मेरा साथ कभी देती नहीं।
लब्जों के शब्द किसे जाहिर करू, किसको समझाऊं अपनी दिल के जज़्बात।

मै ये नहीं कहती कि भगवान मेरा साथ नहीं देता, मै तो बस यहीं कहना चाहती हूं,
उस रब से कि आखिर क्यों सबको बराबर खुशी और बराबर दुख नहीं मिलता,

है तो सब मनुष्य ही।

जिंदगी ने मुझे ऐसे हालात में छोड़ दिया कि मुझको अपने आप से ही रूठ जाने का मन करता हैं क्योंकि लोगों से भी किस अधिकार से रूठा जाए वो तो खुद हमसे दूरियां बनाना चाहते है ।

ए खुदा तू ही बता आखिर क्यों हर किसी की जिंदगी एक सी नहीं होती
या तो तू किसी को बहुत खुशनसीब बनाता है या तो किसी को बहुत बदनसीब ।

जीना भूल गई थी, अब तो जीने की ख्वाहिश भी नहीं रही ।
ए मेरे हमसफ़र मै तो कब से टाइपिंग कर रही हूं, मै तो बस अपने अल्फ़ाज़ लिख रही हूं ।



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2 More responses

  • Ambika
    Ambika (Registered Member)
    Commented on 02-April-2021

    @Dheeru Bangbani
    Tq so much.

  • poemocean logo
    Dheeru Bangbani (Guest)
    Commented on 02-April-2021

    I really liked this poem. Which came directly from your heart. Keep writing and posting such a lovely poem. Best regards- Dheeru.

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