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मेरे सपने तू उड़ान मत भर

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21 -Jan-2021 Parmanand kumar Sad Poems 0 Comments  241 Views
Parmanand kumar

मेरे सपने तू उड़ान मत भर
____________________By Parmanand kumar


मेरे सपने ,तू उड़ान मत भर
मेरे अंतर्मन में कहीं दब जा....
क्योंकि
तेरे पंखुरियों से ,गरीबी की
बू आती है....
**************

मेरे सपने तू उड़ान मत भर
मेरे मन के किसी कोने मे रह जा..
तुझे दुख नहीं दूँगा..
मत उड़ान भर
संग संग ज़माने के
क्योंकि,
तेरी दामन चित्थरों से सजा है
हाल फतेहाल तेरी दास्ताँ है.....
********************

ऐ मेरे सपने तू ,उड़ान मत भर
तू कोई पतंग नहीं
ना मैं तेरा डोर हूँ
कि तू उड़ेगा तो मैं संभाल लूँगा
कहीं टूटा तो
पता नहीं इस जिस्म का क्या होगा
बिन तेरे....

****************
इसलिए कहता हूँ
ऐ सपने, तू उड़ान मत भर...
कहीं अमीरी व अय्याशी के मायाजाल में
तू उलझ न जाए
गुमनाम न हो जाए..

****************
जीवन के महासागर में
भवसागर होते हैं वही पार
जिसका है धन आयाम विशाल
गृह गृहस्थ है जिसका हरियाल
बंधु बांधव में है मेल_ जोल बेमिशाल
और माँ बाप का है छत्र शाल
उनके अंतर्मन के सपने ही
भर सकतें हैं उड़ान.... उड़ान... उड़ान !!


................ *********............

मेरे सपने तू उड़ान मत भर


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