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मेरी आवाज

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29 -Nov-2019 Swarashree Social Poems 0 Comments  256 Views
Swarashree

क्या तू मेरी आवाज सुन सकता है?
मैं चुप बैठने वालों में से नहीं
तेरे बाप का चलता फिरता माल नहीं
क्या समझा था तूने मुझे
इतनी दरिंदगी करने के बाद जाने दूंगी तुझेl

क्या तू मेरी आवाज सुन सकता है?
जो तुझ जैसे हैवान ने मिलकर
मारा पीटा बेरहमी से मुझे खुलकर
ना इज्जत ना लिहाज ना मोहब्बत ना प्यार
एक एक पल का लूंगी बदला, हो जा तैयारl

क्या तू मेरी आवाज सुन सकता है ?
जो सरिए तूने मुझ में डालें
जो कपड़े तूने मेरे उतारे
मनोरंजन का साधन बना पीटा घसीटा जो तूने
आ गई हूं तेरा वही हाल अब करनेl

क्या तू मेरी आवाज सुन सकता है?
मेरे मां-बाप की आंखों से निकला हर आंसू
मेरे मुंह से निकली उन आठ दिनों की हर तड़प
मेरे तन के हर एक जखम का बदला
काली मां का रूप धारण कर आ रही हूं
तेरा गला हलाल करनेl

क्या तू मेरी आवाज सुन सकता है?
यदि नहीं तो अब सुनेगा
मैं तेरे हर समय का चलता फिरता खेल नहीं
मिट्टी का बेजान वह खिलौना नहीं
इंसान हूं मैं, औरत हूं मैं
सीने में दिल है तो हाथों में जान भी
मारना डाला वहीं हास्य करके तेरा
तो कहना,
किसी लड़की को छूने लायक नहीं बचेगा
वह दरिंदगी दोबारा करने लायक नहीं बचेगा तू l



Dedicated to
All the rape victims

Dedication Summary
rape is the most challenging social evil prevailing in the streets of India. Every second day news pops up about the rape happened. So this my poem from all the rape victims to fight back for this evil and get justice.

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