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Mila jab main khud se / मिला जब मैं खुद से

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31 -Mar-2018 shalu L. Spiritual Poems 0 Comments  1,573 Views
Mila jab main khud se / मिला जब मैं खुद से

मिला जब मैं खुद से
किसी चहेरे ने जाना था कहा नाम मेरा पहचाना क्या
रूबरू हुआ मुझसे पूछा जाने कहा खुद को छुपये बैठा था
दो दायरे मन- शरीर के ,एक अपना और दूजा पराया ना था
बाते करता अपनी सी और समझौते पर सही गलत किया था
कितनी दुरी बनायीं सोच ने उससे जैसे मीलों खुद से मैं दूर था
कमल उठा रौशनी की ओर उस खोज में अँधियारा भी बहोत था
परछाई भी नहीं बनी में हूँ या नहीं यही अपने आप को देखा था
मद्धम मद्धम एक एहसास में ख़ामोशी चली आ रही थी
तितली सा उड़ने लगा था में जैसे पत्ते बिखरे हवा थी
किसीकी नजर नहीं मुझ पर जब मै मिला खुद से था
31-3-18 at 4.20 pm

Mila jab main khud se / मिला जब मैं खुद से


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