Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

वह तोड़ती पत्थर नए

0
20 -Aug-2021 kavita chouhan Miscellaneous Poems 0 Comments  140 Views
वह तोड़ती पत्थर नए

तोड़ती रहती हर रोज वो पत्थर नए सिर पर थामे बोझ हाथों में फावड़ा कुदाली लिए निकल पड़ती निज भोर होते ही न मौसम की सुध न सांझ की ख़बर दौड़ती रहती प्रतिदिन कार्य किये बह रही बून्द पसीने की शरीर से उसकी कोमल काया को तरबतर कि

दो जून की रोटी

0
06 -Aug-2021 nil Miscellaneous Poems 0 Comments  34 Views
दो जून की रोटी

दो जून की रोटी हवा थक कर बुनती है सन्नाटा सो जाती है चुपचाप खरगोश केसाथ झाडियों में भोर होते ही दनदनाती हुई घुसकर नहाती दरिया में बहलाती मन चम्पा चमेली गुलाब की कलियों केसाथ खुले हाथों से बाॅटती अहर्निश नया नवे

बेजुबानों (जानवर) का दर्द,

0
17 -Jul-2021 अमित कुमार झा Miscellaneous Poems 0 Comments  64 Views
बेजुबानों (जानवर) का दर्द,

मत मारो, बेजुबानों को,,,,, दर्द, उसे भी होता है,,,, तड़प कर वह भी रोता है,,, कोई कहता है, यह अल्लाह का फरमान है,,, कोई बतलाता है, यह देवी माता का सम्मान है,,,, ए मानव, पूछ तूं अपने आप से, तूं इंसान है, या हैवान है,,, तूं उसकी बलि चढ़ा

*'दिल और रंग'*

0
07 -Jul-2021 Dimpy Rat Miscellaneous Poems 0 Comments  291 Views
*'दिल और रंग'*

दिल पूछता हैं रंग से, तूने मुझे क्या दिया? रंग ने कहा वो सब जो तूने महसूस किया... दिल ने पूछा रंग से, कैसे जुड़ा तुझसे नाता मेरा? रंग ने कहा तेरी हर खुशी तेरे हर ग़म से वास्ता हैं मेरा... दिल ने पूछा रंग से, क्यों रंगता हैं द

1- मौलिक विधा की-सौर्य मंडल,सूरज,मिट्टी,जल,वायु प्रकृतियां

0
13 -Jun-2021 Ran Bahadur Singh Miscellaneous Poems 0 Comments  556 Views
1- मौलिक विधा की-सौर्य मंडल,सूरज,मिट्टी,जल,वायु प्रकृतियां

इस संसार की मौलिक धरा पर, सूरज,जल,वायु मिट्टी तथा सौर्य मल्लिका। प्रकृति रहती मूल भावों में द्वितक्रम, नदी व पर्वत आवर्तिक रहे प्रतिक्रम। जब भी कल्पना सजीवित रहती, द्रश्य उतर-चढ़ में ब्यापक। जब कोई खुद को स्यमं दे

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017