Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

खुशियों के पल

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21 -Dec-2021 Pushplata Kourav Miscellaneous Poems 0 Comments  138 Views
खुशियों के पल

खुशियों के पल होते बहुत अनमोल, पर बनते हैं ये हम से ही तो रोज। बांटकर देखो खुशियां हो जायेंगी भरपूर, बस समेट लो इन्हें इस तरह कि, न जाएं ये अब हमसे दूर। खुशियां रोज देती दस्तक हमारे द्वार, न करें बातों को तोलमोल कर इ

दिया जलाया था हमने

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21 -Nov-2021 Madhu Miscellaneous Poems 0 Comments  134 Views
दिया जलाया था हमने

दिया जलाया था हमने चार दिन की ज़िंदगी है, चिंताओं ने घेरा है। गम का अँधेरा है, सन्न सन्न हवा चल रही है। जलाया था हमने दिया, हवा के झोंके से बुझ गया। अंधियारी रात में काँप उठे हैं, आशा का दीप जला रक्खा है। सुबह आशा का है

कोरोना बस अब तू जा

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01 -Oct-2021 Pushplata Kourav Miscellaneous Poems 0 Comments  102 Views
कोरोना बस अब तू जा

कोरोना बस अब तू जा, नहीं सहा जाता तेरा यहां रहना... बुजुर्गो की छांव के बिना कैसा होगा बचपन, वो मां बाप के बिना कैसा होगा पालन पोषण कोरोना बस तू जा... जो दूर नहीं रह पाते थे एक दूसरे को देखे बिना कुछ दिन, वो विदा हो रहे दु

किस ओर चला इंसान

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28 -Sep-2021 Khushi Miscellaneous Poems 0 Comments  281 Views
किस ओर चला इंसान

देखो किस ओर चला इंसान अपनों को छोड़ हो गया अनजान ना वो खुशियां ना वो अरमान सब देते यहां अपना अपना ज्ञान कहां गए वो घर जो बन गए अब मकान ना बच्चों की किलकारियां, ना वो खेत खलिहान देखो किस ओर चला इंसान अपनों को छोड़ हो

वह तोड़ती पत्थर नए

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20 -Aug-2021 kavita chouhan Miscellaneous Poems 0 Comments  228 Views
वह तोड़ती पत्थर नए

तोड़ती रहती हर रोज वो पत्थर नए सिर पर थामे बोझ हाथों में फावड़ा कुदाली लिए निकल पड़ती निज भोर होते ही न मौसम की सुध न सांझ की ख़बर दौड़ती रहती प्रतिदिन कार्य किये बह रही बून्द पसीने की शरीर से उसकी कोमल काया को तरबतर कि

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