Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

कोरोना: एक मज़ाक

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19 -Aug-2020 Adityaraj Miscellaneous Poems 0 Comments  42 Views
कोरोना: एक मज़ाक

मैंने कोरोना को इतिहास बदलते देखा है! राजनीतिक कुत्तों को साथ भौंकते देखा है!! सोचा था मैंने, मौन रहकर विरोध करना है! लेकिन उससे अच्छा आत्महत्या करना है!! ट्रेन बंदकर साईकिल, स्कूटर से दौड़ाया है! रैलियों में हजारो

हम असहिष्णु हो गए हैं?

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19 -Aug-2020 Adityaraj Miscellaneous Poems 0 Comments  46 Views
हम असहिष्णु हो गए हैं?

हमारे पूजनीय मूर्तियां तोड़ते हो, अराध्य पर भद्दे टिप्पणियां करते हो, भारत विरोधियों से जाकर मिलते हो, टुकड़े - टुकड़े करने की बात करते हो, और फिर कहते हो हम असहिष्णु हो गए हैं! धर्म के नाम पर देश जलाते हो, बात - बात प

Tum tou Khud hi chand ki soorat

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12 -Aug-2020 Naushad Khan Miscellaneous Poems 0 Comments  45 Views
Tum tou Khud hi chand ki soorat

Dard sehna bhi kya zaroori hai? ishq karna bhi kya zaroori hai? Tumko chaha hai jaan say baRh kar, tumsay kehna bhi kya zaroori hai? Tum tou Khud hi ho chand ki soorat, tum peh gahna bhi kya zaroori hai? Yeh jo hotay haiN umr kay bandhan, inka milna bhi kya zaroori hai? Umr’e rafta peh kab shikayat thi, hamko marna bhi kya zaroori hai? Ghair uthtay haiN bazm say dil ki, tera uthna bhi kya zaroori hai? Yeh jo thehray haiN aaNkh meiN aaNsoo, inka behna bhi kya zaroori hai? Sochta hooN, yeh bheeRh meiN, ruk kar, apna chalna bhi kya zaroori hai?

कहां डाले झूला बाबा !!

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17 -Jul-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Miscellaneous Poems 0 Comments  375 Views
कहां डाले झूला बाबा !!

कहां डाले झूला बाबा, ना निमिया ,ना अम्वा , घर के चौबारों पर , बस ऊँचे ऊँचे खम्बवा !! कहाँ डालें झूला बाबा, ना महुआ , ना सेमर , बरखा की दहरी चढ़े, धूप के तेवर !! कहाँ डाले झूला बाबा , ना मल्हरवा ,ना कजरी, सावन वाली रतियाँ में , ब

प्यार या अपनी जात?

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17 -Jun-2020 Risha Deep Miscellaneous Poems 0 Comments  459 Views
प्यार या अपनी जात?

मैं पूजती थी कृष्णा को , और वो श्याम भक्त था धर्म हमारी एक थी , पर हमारा साथ ना था , मैं खुद को सालो तक कोसती रही की मैंने उसका दिल दुःख दिया वो जात के नाम पर छोड़ गया मुझे मेरा कौम दिखा गया इस जात पात के नाम पर फिर दो दिल

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