Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

कल आज और कल

0
कल आज और कल

'कल' 'आज' और 'कल' एक जंग छिड़ी है... जंग-'कल' और 'कल' में एक 'कल' जो बीत गया और एक 'कल' जो आने को है, जिसके पास 'आज' है पर उस 'कल' को मंजूर नहीं कि 'आज' साथ दे इस 'कल' का, उस 'कल' को कुछ खोने का एहसास है,तो इस 'कल' को कुछ पाने की चाहत उस 'कल' ने

भागम भाग

0
30 -Oct-2018 Sunil Sharma Miscellaneous Poems 0 Comments  185 Views
भागम भाग

भागम भाग महानगरों की भीड़ का एक हिस्सा बन गए है इस आपाधापी, मारामारी की जिंदगी में अपनी पहचान खो गए है | यह कैसी भागम भाग वाली दौड़ है कुछ पाने की होड़ है | उसकी कदर नहीं जो पास है कुछ नया पाने की आस है | आ कुछ नया करे इस होड़

Sabki pasand

0
17 -Oct-2018 mithlesh chouhan Miscellaneous Poems 0 Comments  35 Views
Sabki pasand

Pholo ki sabko chahat , katoo ko pasand kon kerta h. chand ki sabko chahat, tapte suraj ko pasand kon kerta h. jhoot bhi mitha ho to sabko pasand aaj kal , kadve sach ko pasand kon kerta h. ajkal jhooto se ho jati h mahobat, sacchoo se mahobat kon kerta h.

तन्हाई

0
11 -Jul-2018 अमर Miscellaneous Poems 0 Comments  355 Views
तन्हाई

तुम जानते हो मैं इतना व्यस्त क्यों हूं उसके जाने के रिक्तता को भरने की एक बेकार कोशीश है हर काम से उसकी याद खुद को जोड़ ही लेती है खुद को जबरन रेस में कर उससे बचना चाहता हूं पर हर मोड़ पर उसकी याद सांपन डंस कर ही जात

दूरीयाँ और नजदीकियाँ

0
18 -Apr-2018 Akshunya Miscellaneous Poems 0 Comments  123 Views
दूरीयाँ और नजदीकियाँ

दूरीयाँ नजदीकियों में तब्दील हो जातीं हैं, जब माँ की साँसें बेटे के दर्द के एहसास भर से बढ़ जाती हैं, वो ही नजदीकियाँ फिर दूरीयाँ बन जातीं हैं, उसी बेटे की माँ उसके लिए ही बोझिल बन जाती है। न होती उस पिता के लिए कभी

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017