Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मैं बिहार हूं

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26 -Mar-2022 Prashant Singh Miscellaneous Poems 0 Comments  27 Views
मैं बिहार हूं

हां मुझे गर्व है, मैं बिहार हू बुद्ध का पावन धरा हूं मैं अशोक का पुकार हूं चाणक्य का नीति हूं मैं विक्रमशिला ज्ञान भण्डार हूं राजेन्द्र का सोच हूं मैं प्रथम राष्ट्रपति आधार हूं हां मुझे गर्व है ,मैं बिहार हूं । दि

खुशियों के पल

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21 -Dec-2021 Pushplata Kourav Miscellaneous Poems 0 Comments  405 Views
खुशियों के पल

खुशियों के पल होते बहुत अनमोल, पर बनते हैं ये हम से ही तो रोज। बांटकर देखो खुशियां हो जायेंगी भरपूर, बस समेट लो इन्हें इस तरह कि, न जाएं ये अब हमसे दूर। खुशियां रोज देती दस्तक हमारे द्वार, न करें बातों को तोलमोल कर इ

दिया जलाया था हमने

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21 -Nov-2021 Madhu Miscellaneous Poems 0 Comments  309 Views
दिया जलाया था हमने

दिया जलाया था हमने चार दिन की ज़िंदगी है, चिंताओं ने घेरा है। गम का अँधेरा है, सन्न सन्न हवा चल रही है। जलाया था हमने दिया, हवा के झोंके से बुझ गया। अंधियारी रात में काँप उठे हैं, आशा का दीप जला रक्खा है। सुबह आशा का है

कोरोना बस अब तू जा

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01 -Oct-2021 Pushplata Kourav Miscellaneous Poems 0 Comments  282 Views
कोरोना बस अब तू जा

कोरोना बस अब तू जा, नहीं सहा जाता तेरा यहां रहना... बुजुर्गो की छांव के बिना कैसा होगा बचपन, वो मां बाप के बिना कैसा होगा पालन पोषण कोरोना बस तू जा... जो दूर नहीं रह पाते थे एक दूसरे को देखे बिना कुछ दिन, वो विदा हो रहे दु

किस ओर चला इंसान

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28 -Sep-2021 Khushi Miscellaneous Poems 0 Comments  391 Views
किस ओर चला इंसान

देखो किस ओर चला इंसान अपनों को छोड़ हो गया अनजान ना वो खुशियां ना वो अरमान सब देते यहां अपना अपना ज्ञान कहां गए वो घर जो बन गए अब मकान ना बच्चों की किलकारियां, ना वो खेत खलिहान देखो किस ओर चला इंसान अपनों को छोड़ हो

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