Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

अंधा कानून

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03 -Aug-2019 Divya Raj kumar Miscellaneous Poems 0 Comments  139 Views
अंधा कानून

कागज़ के टुकड़ों पर नींव भ्रष्टाचार का रखा जा रहा उन टुकड़ों के बल पर सदाचार गवाया जा रहा भुल प्रतिज्ञा सारे अपने अपना ईमान बेच रहे सरकारी कर्मचारी, पुलिस सभी चंद रुपयों के मोल बिक रहे ये खेल है बस पैसों का मजदूरों प

My shaar1

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27 -Jun-2019 Mansoor Miscellaneous Poems 0 Comments  38 Views
My shaar1

1. Suna hai har nasha bura hai, Mohabbbat ko chhod kar baat bahut mukhtasir hai, hamein tum se mohabbat hai 2. Akad kar chal na ae insaan teri pehchaan kitni hai Mehaz ek saans hai ye jism is mein jaan kitni hai 3. Ghhalib ka dard na meer ki aah ki hai zarurat mujhko Mere sher khud hain ik ghhazal main khud mukammal ek kitaab 4. Saare hunar seekh liye maine is zamanane se Badma’ashi, badkhayali, badnazri aur badfaeli 5. Jaane kab ke mar gaye wo log Jo zindo ko sahaara diya karte they 6. Ek namumkin si ummid mein puri zindagi guzar di Jese bik

दोहा

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31 -May-2019 Ravi Ranjan Goswami Miscellaneous Poems 0 Comments  217 Views
दोहा

बनता, बिगड़े आप ही। बिगड़ा, न बन पाये। कोशिश ऐसी चाहिये। बिगड़ा, फिर बन जाय।

सासू माँ को माँ कैसे बोल दू

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14 -May-2019 Maya Ramnath Mallah Miscellaneous Poems 0 Comments  162 Views
सासू माँ को माँ कैसे बोल दू

सासू माँ को माँ कैसे बोल दू जो मुझे अपने जिगर का टूकडा़ मान पाती नही सासू माँ को माँ कैसे बोल दू जो मेरे सर पर हाथो से सहलाती नही सासू माँ को माँ कैसे बोल दू जो मुझे परीयो की कहानी सुनाती नही सासू माँ को माँ कैसे बोल

कब्रों के बासिन्दे ।

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08 -Apr-2019 Ravi Ranjan Goswami Miscellaneous Poems 0 Comments  139 Views
कब्रों के बासिन्दे ।

कुछ लोग अब कब्रों में रहते हैं, न मालूम वे जिंदा हैं या मरे हैं ? मैंने उन्हें कब्रों से निकलते देखा है। तेज कदम न मालूम कहाँ जाते है। न नजरें मिलाते हैं न बात करते हैं। लौटकर खुद ब खुद दफन हो जाते हैं।

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