Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

1- मौलिक विधा की-सौर्य मंडल,सूरज,मिट्टी,जल,वायु प्रकृतियां

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13 -Jun-2021 Ran Bahadur Singh Miscellaneous Poems 0 Comments  93 Views
1- मौलिक विधा की-सौर्य मंडल,सूरज,मिट्टी,जल,वायु प्रकृतियां

इस संसार की मौलिक धरा पर, सूरज,जल,वायु मिट्टी तथा सौर्य मल्लिका। प्रकृति रहती मूल भावों में द्वितक्रम, नदी व पर्वत आवर्तिक रहे प्रतिक्रम। जब भी कल्पना सजीवित रहती, द्रश्य उतर-चढ़ में ब्यापक। जब कोई खुद को स्यमं दे

इंतज़ार है मुझे

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06 -May-2021 Jyoti Miscellaneous Poems 0 Comments  94 Views
इंतज़ार है मुझे

इंतजार है मुझे हाँ ! उस दिन का अब जब मैं कहूँ तुमसे ए जिंदगी तुम वही हो ना जिसे पढ़ते रहे ता-उम्र हम खुली किताब की तरह सोचा बहुत ,समझा बहुत खुद को जाने क्या क्या समझते रहे नतमस्तक हूँ तेरे आगे आज मैं अभी भी तुझे सिखान

क्या हुआ जो मसीहा मेरा सर तराश हो गया

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24 -Apr-2021 सिफ़र Miscellaneous Poems 0 Comments  204 Views
क्या हुआ जो मसीहा मेरा सर तराश हो गया

क्या हुआ जो मसीहा मेरा सर तराश हो गया ? ख़िताब-ए-शहीदी पे नाम मेरा नवाज़ तो गया , सफ़र-ए-जन्नत को जाता था ख़ुदा की ओर , टकराया दरअस्ल ,लो मेरा फ़िरदौस तो गया , सारे रास्ते रूह मेरी प्यासी, पर पाक थी यहां , मय देखि कि, ईमान गया मे

ख़राब किया करते है

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18 -Apr-2021 सिफ़र Miscellaneous Poems 0 Comments  121 Views
ख़राब किया करते है

वो तू नहीं जिसे पेश आदाब किया करते है , बाज़ार है हम बस दाम ख़राब किया करते है ,, तेरे तर्क़ से पहले ही था में शायर दिलजला , तेरा तो बस हम नाम ख़राब किया करते है ,, जो प्यास से लगता हो बेहाल उसको दे साक़ी , हमारा क्या हम बस जाम ख़

मौत का सन्नाटा है

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18 -Jan-2021 Parmanand kumar Miscellaneous Poems 0 Comments  409 Views
मौत का सन्नाटा है

मौत का सन्नाटा है! ********************* 1.हर तरफ मौत का मंजर है। किधर जाएं यारों? जिंदगी परेशान है इधर या उधर जाएँ यारों! हर तरफ मौत का मंजर है किधर जाएं यारों? 2. हर गली, कुचे से निकलता है ,जनाज़ा यारों! ना अपनो का कंधा ही किस्मत मे ल

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