Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

प्यार या अपनी जात?

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17 -Jun-2020 Risha Deep Miscellaneous Poems 0 Comments  215 Views
प्यार या अपनी जात?

मैं पूजती थी कृष्णा को , और वो श्याम भक्त था धर्म हमारी एक थी , पर हमारा साथ ना था , मैं खुद को सालो तक कोसती रही की मैंने उसका दिल दुःख दिया वो जात के नाम पर छोड़ गया मुझे मेरा कौम दिखा गया इस जात पात के नाम पर फिर दो दिल

वक़्त के साथ

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21 -May-2020 Satyam Devu Miscellaneous Poems 0 Comments  111 Views
वक़्त के साथ

कहते हैं- वक़्त के साथ-साथ चलना वक़्त कमबख्त, वक़्त के साथ बदल जाता है वक़्त के साथ-साथ नजरें भी कमजोर होने लगती है मग़र वक़्त के साथ-साथ, नजरिया भी निखर आता है वक़्त के साथ-साथ, भूगोल भी बदलते देखा है इतिहास भी बदलत

विचार-कवि-कविता

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16 -May-2020 Nikhil Tripathi Miscellaneous Poems 0 Comments  302 Views
विचार-कवि-कविता

मन कितना नादान है,करता जो रहा अभिमान है चंद सुनहरे शब्द लिखें,कहता कविता में जान है हर ज़ुबाँ पर हो वाहवाही,जग में कुछ सम्मान हो सुनता नही दिल की मेरे,समझाओ इस अंजान को। कहना ख़ुद को कवि अभी,कविता का अपमान है शब्द रच

अनन्त पतझड सा मेरा हृदय हो चला !

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07 -Apr-2020 Ankita Singh Miscellaneous Poems 0 Comments  567 Views
अनन्त पतझड सा मेरा हृदय हो चला !

अनन्त पतझड सा मेरा हृदय हो चला , राह बाहरो की उसको दिखाते चलो ! पथ भ्रमित होकर जो गिरु गर्त में, मंत्र हौसले का देकर उठाते चलो ! मैं नहीं हूँ , नहीं हूँ चाँद सी आरजू , दीप अमावस का हूँ मैं जलाते चलो l अनन्त पतझड सा मेरा हृ

मैं अधूरी

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14 -Feb-2020 Ankita Singh Miscellaneous Poems 2 Comments  1,108 Views
मैं अधूरी

मैं अधूरी , अधूरा है चादँ । तारों की रहगुजर में , सूना है चादँ ।। मैं अधूरी , अधूरी हैं लहरे । साहिल से टकरा के , ये समुन्दर पर न ठहरे ।। मैं अधूरी , अधूरी हैं नदिया । सागर तक पहुंचने में लगती है इन्हे सदिया ।। मैं अधूरी ,

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