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मिठास ढूंढता हूँ

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09 -Jul-2020 Jyoti Ashukrishna Friendship Poems 0 Comments  432 Views
मिठास ढूंढता हूँ

जिंदगी की भागदौड़ से जब थक जाता हूँ
आँख मूँद बैठता, फिर वो एहसास ढूंढता हूँ
वो मेरे यारों-दोस्तों के संग की मिठास ढूंढता हूँ

स्कूल में वो एक चॉकलेट के लिए लड़ना- झगड़ना, रूठना-मनाना
छोटी सी बात पर मुँह फुलाना, फिर मिलकर शैतानियां कर जाना
एक-दूसरे को टीचर की डांट से बचाना, भूत-प्रेत की कहानियाँ सुनाकर डराना
बारिश में साथ-साथ भीगना, पानी भरे गड्ढों में कागज की कश्ती तैराना
पिगी बैंक से पैसे निकाल छिप कर बर्फ के गोले खाना, पापा की डांट खाकर भी क्रिकेट खेलने जाना
आज पार्क में बच्चों की टोली देख उसमें अपना अंदाज ढूंढता हूँ
वो मेरे यारों-दोस्तों के संग की मिठास ढूंढता हूँ

वो दसवीं बोर्ड से सबका साथ डरना, पढना पर ट्यूशन में नई आई लड़की से दोस्ती के लिए एक-दूसरे से भिड़ जाना
वो पीछे बैंच पर बैठकर मस्त राम पढना, गणित की क्लास में एक- दूसरे के कांधे पर सिर रखकर सो जाना
पेड़ के पीछे बैठकर वो पहली बार सुटटे लगाना, यारों का गैंग बनाकर रौब जमाना
ट्यूशन से घर लौटते किशोरों में अपना अफसाना ढूंढता हूँ
वो मेरे यारों-दोस्तों के संग की मिठास ढूंढता हूँ

कालेज के पहले दिन एक-दूसरे पर इम्प्रेशन जमाना, सीनियर्स को देखकर सबका भीगी बिल्ली बन जाना
कैंटीन में बैठकर लड़कियों को ताड़ना, एक ही लड़की को एक-दूसरे की भाभी बताना
किसी यार को देवदास से फिर से हीरो बनाना, किसी की सेटिंग के लिए गर्ल्स होस्टल की दीवार फांद कर जाना
एक यार की बाइक की रेल बनाना, सबका एक ही पेपर में बैक आने पर पार्टी मनाना
थियेटर के अंधेरे में किसिंग सीन पर लगे रहो भाई सुनकर अपना इतिहास ढूंढता हूँ
वो मेरे यारों-दोस्तों के संग की मिठास ढूंढता हूँ

नौकरी की जद्दोजहद में साथ उलझना, संडे को चाय की टपरी पर बैठ बाॅस को गाली बरसाना
पहली सैलेरी मिलने पर पार्टी मनाना, हैंग ओवर उतरने पर सुबह को घर जाना
गोवा के ट्रिप के लिए बीमारी का बहाना बनाना, बींच पर बिकनी गर्ल के साथ फोटो खिंचवाना
दोस्त के रिश्ते के लिए आई लड़कियों में से उसके टाइप की सलेकट करवाना, बारात में नागिन डांस कर इतराना
चाय की टपरी पर बैठे लूडो खेल रहे कुआंरों की मस्ती देख अपना आकाश ढूंढता हूँ
वो मेरे यारों-दोस्तों के संग की मिठास ढूंढता हूँ

दोस्त का फोन आने पर बहाने बनाना, बीवी को शापिंग कराने ले जाना
ऑफिस की चिललम-चिल्ली से पक कर घर आना, बच्चों की मस्ती देख उन्हें डांटना
अकेले छत पर बैठ कर दो पैग लगाना, सिगरेट के कश में तनाव को भुलाना
कुछ देर खुद को कोसना, कभी बिना बात बीवी पर झल्ला जाना
बेटी से स्टेटस पर लाइक की बातें सुन 'फेसबुक 'किताब में यादों के पन्ने टटोलता हूँ
वो मेरे यारों-दोस्तों के संग की मिठास ढूंढता हूँ ।

ज्योति आशुकृषणा



Dedicated to
शैवाल अग्रवाल

Dedication Summary
इस कविता की प्रेरणा हैं ।

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