Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

वह है आईने सा।

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20 -Dec-2021 ताज मोहम्मद Moral Education Poems 0 Comments  31 Views
वह है आईने सा।

वह है आईने सा सब को सच्चाई ही बताता है। अक्स है जिसका जैसे बस वैसे ही दिखाता है।।1।। उसकी ये पहचान उसके लिए ही है खतरनाक। क्योंकि वो सच को झूठ कभी भी ना बनाता है।।2।। उसके अपने ही उससे है बहुत ही यूँ तो परेशां। वह अप

खिलेगा बीच काँटों के फिर से गुलाब।

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09 -Aug-2020 Dr. Swati Gupta Moral Education Poems 0 Comments  858 Views
खिलेगा बीच काँटों के फिर से गुलाब।

शराफत का पहने हैं वो नकाब, सम्भल कर रहिये जरा तुम जनाब। ईर्ष्या द्वेष का जहर मन में छिपा, शक्कर बातों में घोले वो बेहिसाब। झूठ का तानाबाना बुना हर तरफ, छिपाकर के सच को समझ बैठे कामयाब। झूठ की उम्र होती है छोटी बहुत,

पाना चाहता था तूजको पर तुझसे दूर चला गया

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13 -Jul-2020 Abutorab dyer Moral Education Poems 0 Comments  609 Views
पाना चाहता था तूजको पर तुझसे दूर चला गया

सदियों से है तलाश तेरी नहीं मिली तूह किसीको जंग लड़ी खून बहाया कई राजाओं ने तेरे लिए पैसा दोलत सोहरत मिली बस जो ना मिला वो तु थी जो चाहा वो मिला था और जो ना मिला वो छीन लिया कर के घर बर्बाद लोगों के अपने महल को आबाद क

Aya gubbare wala aya

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20 -Dec-2019 Harjeet Nishad Moral Education Poems 0 Comments  1,727 Views
Aya gubbare wala aya

Aya gubbare wala aya. Rang birange gubbare laya. Lal hare peele gubbare. Neele narangi gubbare. Her rang man ko bhaya. Aya gubbare wala aya. Aao bachcho lo gubbare. Unche svar men ye pukare. Guchchha gubbaron ka laya. Aya gubbare wala aya. halaki hava hai jinke ander. vo gubbare udate uper. uncha lakshya dikhaya. Aya gubbare wala aya. Sab gubbare sath hain rahate. Rang ke karan nahin jhagadate. Sab ko yah samjhaya. Aya gubbare wala aya.

गोल

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17 -Nov-2019 MANOJ POOSAM Moral Education Poems 0 Comments  658 Views
गोल

गोल है भाई गोल,पूरी दुनिया है गोल चनदा मामा है गोल,हमारी धरती है गोल| हमारी अंतरिश्र में सबी गरह है गोल गोल है भाई गोल,पूरी दुनिया है गोल| माता की बिनदी है गोल,पापा की रिनग है गोल दादी की चसमा है गोल,दादा की घड़ी है गो

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