Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

अजब कहानी

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09 -Aug-2022 nil Moral Education Poems 0 Comments  47 Views
अजब कहानी

अजब कहानी अजब कहानी सुनो सुनाता अजब कहानी पानीदार हुए बेपानी सरिताओं की गायब कलकल /तन मन छीजरहा पलपल याद आरही सबको नानी ... हार खेत को मिले ना पानी /फसलें कैसे हो मनमानी जीवन की मिट रही निशानी ... धरा गगन की बदली भाषा /

पहचान ही क्या

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23 -Apr-2022 Swami Ganganiya Moral Education Poems 0 Comments  267 Views
पहचान ही क्या

जो पहले ही कदमो में लडखडा जाये वो चाल ही क्या ? जो तेज भी दौडे और मंजिल तक न पहुँचे वो रफ्तार ही क्या ? जो चहरा देखकर मुँह फेर ले वो प्यार ही क्या ? एक टक देखते रहे और कुछ ना देखे उन आँखों का ऐतबार ही क्या ? सबको अच्छे से

वह है आईने सा।

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20 -Dec-2021 ताज मोहम्मद Moral Education Poems 0 Comments  132 Views
वह है आईने सा।

वह है आईने सा सब को सच्चाई ही बताता है। अक्स है जिसका जैसे बस वैसे ही दिखाता है।।1।। उसकी ये पहचान उसके लिए ही है खतरनाक। क्योंकि वो सच को झूठ कभी भी ना बनाता है।।2।। उसके अपने ही उससे है बहुत ही यूँ तो परेशां। वह अप

खिलेगा बीच काँटों के फिर से गुलाब।

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09 -Aug-2020 Dr. Swati Gupta Moral Education Poems 0 Comments  964 Views
खिलेगा बीच काँटों के फिर से गुलाब।

शराफत का पहने हैं वो नकाब, सम्भल कर रहिये जरा तुम जनाब। ईर्ष्या द्वेष का जहर मन में छिपा, शक्कर बातों में घोले वो बेहिसाब। झूठ का तानाबाना बुना हर तरफ, छिपाकर के सच को समझ बैठे कामयाब। झूठ की उम्र होती है छोटी बहुत,

पाना चाहता था तूजको पर तुझसे दूर चला गया

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13 -Jul-2020 Abutorab dyer Moral Education Poems 0 Comments  713 Views
पाना चाहता था तूजको पर तुझसे दूर चला गया

सदियों से है तलाश तेरी नहीं मिली तूह किसीको जंग लड़ी खून बहाया कई राजाओं ने तेरे लिए पैसा दोलत सोहरत मिली बस जो ना मिला वो तु थी जो चाहा वो मिला था और जो ना मिला वो छीन लिया कर के घर बर्बाद लोगों के अपने महल को आबाद क

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