Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

कहो ना प्रिय भँवर है

0
29 -Mar-2021 Keshav Motivational Poems 0 Comments  73 Views
कहो ना प्रिय भँवर है

कहो ना प्रिय भँवर है। उड़ान को पंख नहीं है। दूर-दूर अंबर ऊँचा है। और क्षितिज पर स्याह परत। मन की व्यथा कुंद हो रहा। ओ प्रिय जीवन राग अधर है।। मृदुलता खो गया है ओस सा। जैसे ओस सूर्य किरण के आए। इधर-उधर है अथाह भँवर सा।

सुनसान सी सङक है

0
26 -Mar-2021 Keshav Motivational Poems 0 Comments  13 Views
सुनसान सी सङक है

सुनसान सी सड़क है,मैं हूं अकेला,सफर जिन्दगी है सपनों का मेला! थकने लगा हूं रुकने लगा हूं,डरना मना है कोई बताए ऐसे हमको!! लंबा सा चौराहा-वहां घना सा अँधेरा,दूर कहीं मुझसे है खुशियों का डेरा! रुकने लगा हूं-समझ आए कैसे,ड

आशा

0
26 -Mar-2021 Akhil Dubey Motivational Poems 0 Comments  36 Views
आशा

यदि मिले"ख्याति"तो उसके आगे 'कु' नहीं 'वि'रहे। २-गति मिले तो उसके आगे वीर रहे। ३-कोई सैनिक मरे तो उसके आगे "अमर शहीद"रहे क्योंकि वह वीर नहीं 'परमवीर' होता है। ४-गुण मिले तो उसके आगे 'अव' नहीं 'सद' रहे। ५-जब तक जीवन रहे "आशा"

शोर सा है गली-गली

0
26 -Mar-2021 Keshav Motivational Poems 0 Comments  41 Views
शोर सा है गली-गली

शोर सा है गली-गली, पहचान बिक रहा है, सम्मान बिक रहा है। खरीदार है बाजार में हर तरफ, झूठी खुशी का सामान बिक रहा है।। वो कौन जानता है, कीमत लगेगा कैसे, हर तरफ शुरूआत हो गई है। यह बाजार है हसरतों का, कोशिशों का दौर है इंसा

कब तक माववता के धैर्य को तौलेगा

0
21 -Mar-2021 Keshav Motivational Poems 0 Comments  17 Views
कब तक माववता के धैर्य को तौलेगा

कब तक मानवता के धैर्य को तौलेगा कब तक मानवता के धैर्य को तौलेगा। सिंहासन अब कुछ ना कुछ तो बोलेगा। आज हुआ जो अभिमान छिन्न-भिन्न। शायद तो क्रुद्ध हो राजनीति क्या डोलेगा। अब कब तक भृगु का नयन कुपित होगा। किवदन्ती है

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017