Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Uth Kar Girna

0
01 -Sep-2015 satyadeo vishwakarma Motivational Poems 0 Comments  2,256 Views
satyadeo vishwakarma

आगे जाने की चाहत में उठता गिरता रहता है,
चट्टानों से टकराकरके सागर बढ़ता रहता है
जिसने संघर्ष किया जीवन में मंज़िल उसने पाया है,
आग में पड़कर देखो तो सोना भी चमकता रहता है .
कायर बुझदिल बैठ किनारे लहरों को गिना करते हैं ,
टकराता जो लहरों से वह मोती पता रहता है ।
उठकर गिरना गिरकर उठना जीवन का है सत्य वही ,
बदल बदल कर वस्त्र नए गुलशन भी सँवरता रहता है ,
छोड़ो गम की बातें आओ तुमको तो मैं दिखलाऊ
कैसे रातों से यह जुगनू हरदम लड़ता रहता है
एक दिया जो जला के आयामैंने हवाओं के घर में
रुक रुक करके भले सही त उम्र वो लड़ता रहता है.



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017