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मुझे इन्सान मत बनाना

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30 -Jun-2021 राकेश कुमार राठौर Sad Poems 0 Comments  329 Views
राकेश कुमार राठौर

मुझे इन्सान मत बनाना

एक दिन सहसा मैं रुक सा गया
नजर गया एक कीड़े की ओर
मैनें कीड़े से पूछा, क्यों भाई क्या हाल – चाल है?
वह कीड़ा भी ठहर सा गया
वह बोला यह भी क्या जिंदगी है
न ठीक से जी रहें हैं, न ही मर रहे हैं
मैनें उससे कहा “इन्सान” बनोगे
मैं “इन्सान” की कहानी सुनाता हूँ
मैनें उससे बोला इस तरह ---
इन्सान मतलबी होता है
इन्सान में प्रतिस्पर्धा होती है
इन्सान जीवन भर “हाय – हाय” करता है
कभी वह चैन की नींद सो नही पाता है
इन्सान का ईमान भी पैसे के लिए बिक जाता है
इन्सान आपस में “यह मेरा- वह तेरा” कहता है
इन्सान ही मालिक के रुप में
इन्सान का शोषण करता है
इन्सान ही मजदूर के रुप में
मालिक का पोषण करता है
यह इन्सान ही “चिकित्सक” के रुप में “मानवता” को शर्मसार करता है
यह इन्सान ही “मुर्दो” से पैसे वसूलता है
यह इन्सान ही “पैसे” से इन्साफ खरीदता है
यह इन्सान ही “मुजरिम” के रुप में अपना “बयान” खुद लिखता है
यह इन्सान ही “स्कूल” रुपी “दुकान” खोलकर ज्ञान बेचता है
यह इन्सान ही भूखे पेट के लिए कई अपराध करता है।
आदि – आदि ----- कर्म मैनें कीड़े को सुनाया
यह सुन कर वह कीड़ा सोच में पड़ गया
उसका भी स्वप्न था कि मैं भी नेक “इन्सान” बनू
मैं भी इन्सान जैसे कार्य करूँ
मेरी बात सुनकर भगवान से उसने कहा
हे ईश्वर मुझे इन्सान मत बनाना
मैं इसी में खुश हूँ, मुझे इन्सान मत बनाना।।।

राकेश कुमार राठौर
चाम्पा (छत्तीसगढ़)



Dedicated to
जीवन को समर्पित

Dedication Summary
एक कीड़े और इन्सान का संवाद वास्तविकता पर आधारित

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