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मुझे तुम याद आती हो..

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23 -Oct-2019 Robin Love Poem 0 Comments  1,752 Views
मुझे तुम याद आती हो..

जितना भूलने की कोशिश करता हू उतना
मुझे तुम याद आती हो

जब इश रिमझिम बारिश मै कोयल अपने सुरो मोशम को सजाती है.. ओर इश काले बादल मै तारे जुगनू की तरह चमकते है

तब मुझे तुम याद आती हो

जब मै इश भीड़ मै आखे खोलता हू तो पूरी दुनिया नज़र आती है बस तुम नज़र नहीं आती
ओर जब अंखे बंद करता हू तो इश अंधरे मै सिर्फ ओर सिर्फ तुम ही नज़र आती हो
मै फिर से तेरे याद मै खो जाता हू

तब मुझे तुम याद आती हो

अब इन ओठो को तेरी इबादत सी हो गई है.. इन कानो को तेरी आदत सी हो गई
अब मै तुमारी तारीफ क्‍या करू
मै तुम्हें चाँद भी नहीं कह सकता क्युकी चाँद कुछ ही दिन अपनी चांदनी बेखेरता है ओर Tm हमेशा
अगर तुम्हें आग भी देख ले उसको खुद से जलन हो जाएगी
अगर तुम एक बार मुस्करा देती हो सागर के मोजे मै जितनी मोती है वो भी feki पड़ जाती है
जब शाम ढलती हुई खुले असमान को देखता हू

मुझे तुम याद आती हो


जिंदगी भी कभी जिंदगी हुआ करती थी.. अब तेरे नाम की इबादत सी हो गई है

वो क्‍या है ना
एक शाम खुदा ने हमे रेअहमत मै दी थी
बस मै था ओर तू थी ओर कुछ दिन हमारी पुरानी दिल्लगी थी



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