Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मुखौटा....!!

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Mask...!! "Face on face" Something else in the moment and some more ... !! To be honest, do not know how many faces this mask have.. !! The history of masks is considered to be very old in the world. In ancient times, drama was held at various places and entertainment was the only instrument. In this, masks played an important role; in the languages ​​of the state, dramas were performed in the form of Raslila, Ramlila and Nautanki. These were some of the characters in the drama festivals, such as Ravana, Kumbhakaran, Ganesh and Hanuman, which were known only by their masks. Mask was also very helpful in play because using the mask an single artist could perform multiple characters simultaneouslu. At that time, "masks were used not only to deceive but to present the truth, but in today's ordinary life the mask has become a symbol of fame and deception, It is very difficult to recognize who is Rama and who is Ravana. It is difficult to know who is true and who is a liar, but it is equally true that this mask in life may have been helpful in bringing us back to reality or maybe we can take it off from our face.

विनोद सिन्हा-

मुखौटा...!! "चेहरे पर चेहरा" क्षण में कुछ और दूसरे क्षण में कुछ और ...!! सच कहें तो अपने आप आप में न जाने कितने चेहरे लिए होता है ये "मुखौटा"..!! दुनिया में मुखौटों का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है.प्राचीन काल में जगह जगह नाटक का आयोजन होता था और मनोरंजन का एक मात्र साधन भी.इसमें मुखौटों की अहम भूमिका रहती थी,लोकभाषाओं में रासलीला,रामलीला और नौटंकी के रूप में नाटक किए जाते थे,जो कहीं कहीं अब भी प्रचलन में हैं.इन नाट्य उत्सवों में रावण, कुम्भकरण, गणेश, हनुमान जैसे पात्रों का परिचय उनके मुखौटों से ही होता था.मुखौटों के इस्तेमाल की एक ख़ास बात ये भी होती थी की एक कलाकार कई मुखौटों का प्रयोग कर मंच पर एक समय पर अलग-अलग किरदार निभा सकता था. उस समय ''मुखौटे केवल धोखा देने के लिए ही नहीं बल्कि सच्चाई को प्रस्तुत करने के लिए भी लगाए जाते थें,पर आज साधारण जीवन में मुखौटा सिर्फ फ़रेब और धोखे का प्रतीक बन कर रह गया है,कौन राम है और कौन रावन पहचानना भी मुश्किल है,कौन सच्चा कौन झूठा जानना भी कठिन लेकिन यह भी उतना ही सच है कि जीवन में यही मुखौटा हमें यथार्थ में लौटा लाने में सहायक भी होता या हो सकता है बस हमें इसे अपने चेहरे से उतार फेकने की आवश्यकता है.।

मुखौटा...!!

बहुत प्रभावशाली होता है यह "मुखौटा"
अपने आप आप में एक चेहरा होता है "मुखौटा"
क्षण में कुछ और दूसरे क्षण में कुछ और
जाने कितने चेहरे लिए होता है ये "मुखौटा"
यहाँ हर किसी के चेहरे पर कुछ और
मन में होता कुछ और है
जैसे कि हर कोई एक मुखौटा पहने
घूम रहा हो जिसे पहचानना भी मुश्किल
और मुखौटे से बाहर लाना भी
सबके चेहरे पर चढ़ा होता है "मुखौटा"
कोई दर्द छुपाता फिरता है
तो कोई चेहरे की उदासी है छुपा रहा होता
कोई प्रसन्नता ढक रहा होता है
तो कोई ईर्ष्या को होता है छुपा रहा
कोई किसी से खुशी छुपाता है
तो कोई ग़म हैं अपना छुपाता दिखता
कहीं फरेब छुपा होता है तो
कहीं आँसू होता है हँसी के पीछे छुपा
जाने क्या क्या छुपाए रहता है ये "मुखौटा"
आज हर चेहरा एक मुखौटा है
हर मुखौटे के पीछे एक चेहरा है
चेहरा ही मुखौटा है मुखौटा ही चेहरा है
किसी पे सच का मुखौटा चढा है
तो किसी पे झूठ का चढा है "मुखौटा"
हाँ सबके चेहरे पर चढ़ा होता है "मुखौटा"
पर सच कितना अच्छा होता है ये "मुखौटा"
कभी किसी की खूबसूरती है छुपा लेता
तो कभी किसी की बदसूरती
कभी किसी का पाप है छुपा लेता
तो कभी किसी को पुण्यात्मा
बना देता है यह "मुखौटा"
इसे लगा कर दानव भी है मानव बन जाता
और मानव की तो खैर बात ही क्या
मुखौटा ही मुखौटा है
कहां जायें किसे मानें
किस पर भरोसा करें
सिर्फ इंसान की बात हो तो कर भी लें
यहाँ तो हर चेहरे पर मुखौटा है
हर कोई मुखौटे की आड़ में छुपा बैठा है
यहाँ पल पल सब कुछ बदलता है
अपना बन अपना ही अपने को छलता है
मक्कारों का है बाजार सजा
जहाँ धर्म ईमान सब है बिक रहा
बिकती है मानवता और
भगवान भी यहाँ चेहरों पर बिकते हैं
कुछ ऐसे भी चेहरे दिखते है
जो प्रेम-अनुराग में भी ज़हर भर देते हैं
यहाँ सब अपना असली रूप छिपाते हैं
मन ही मन में हैं गारियाँ देतें
पर ऊपर से मुस्कुराते हैं
रखते दिल के अंदर खोट ही खोट
और सिर्फ झूठा प्यार जताते हैं
यहाँ सब दिखते हैं तो गहरे गहरे पर
ये मुखौटे कोई उतार नहीं पाते हैं
राम राम मुख से हैं सब जपते
और रावण बन पीठ में खंजर घोप जाते हैं
बड़े विचित्र होते है ये "मुखौटे"
किसी को पल भर में है राम बना देता तो
किसी को रावण बना देता है "मुखौटा"
हाँ बहुत प्रभावशाली होता है यह "मुखौटा"
यहाँ राम को मुखौटा लगा दो
तो वह रावण हो जाता है
और रावण को मुखौटा लगाया
तो वह बन गया राम
आज हर जगह हर चेहरे पर चेहरा है
किस मुखौटे के पीछे ना जाने
क्या क्या रहस्य छुपा होता है
कोई नहीं जानता
पाखंड के इस दौर में
जुगनू सूरज बन कर फुदक रहा होता है
फैलाकर भ्रम देवत्व का यहाँ
डाकू भी साधु बन प्रवचन करता है
किसी बंद लिफाफे के आकर्षण सा
रहस्यमय बना फिरता है यह "मुखौटा"
अपने आप आप में कई चेहरा
लिए फिरता है "मुखौटा"
बहुत प्रभावशाली होता है "मुखौटा"
हाँ बहुत प्रभावशाली होता है यह "मुखौटा"

विनोद सिन्हा "सुदामा"



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1 More responses

  • poemocean logo
    Vibha Rani Shrivastava (Guest)
    Commented on 19-October-2018

    आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 20 अक्टूबर 2018 को लिंक की जाएगी ....http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!.

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