ना धुतकारो तुम मुझे.....!

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Na Dhutkaro Tum Mujhe: One of the best and emotional poem on helpless childhood or children. This poem describe how a orphan child start begging when he could not get food and clothes from anywhere. Some people are giving him food, clothes and money while some people ask him to go away. The poet become very sad after seeing this condition of child. He is requesting to eveyone to help the child to save the childhood.

12 -Oct-2017 pravin tiwari Social Issues Poems 1 Comments  38 Views
ना धुतकारो तुम मुझे.....!

कल सड़क पर मैंने एक बेबस बचपन को देखा
आँख मेरी तब भर आई जब
उस बच्चे को रोटी के लिए लोगों के सामने गिडगिडाते देखा

जहां लोग कहते हैं बच्चे तो भगवान् का रूप होते हैं
आज मैंने उस भगवान् को लोगों के सामने हाथ फैलाते देखा

दर्द कितना उसके दिल में
उसके दिल का दर्द मैं आज इस कविता में बयान करता हूं

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ना धुतकारो तुम मुझे,
आखिर मैं भी तो एक इंसान हूं....

माँ-बाप का कोई पता नहीं,
शायद इस लिए मैं अनाथ हूं....

ना मिली ममता की गोद,
ना ही पिता का प्यार मिला,

जबसे होस संभाला तबसे,
इन सड़कों पे दिन बिताता हूं....

सुबह होते ही जब बच्चे सारे,
स्कूल की और दौड़ लगाते हैं....

पेट की आग बूझाने को मैं,
लोगों के आगे हाथ फैलाता हूं....

कोई देता कुछ पैसे तो,
कोई गाली देकर भगा देता है....

बस माँगता हूं कुछ खानेको,
जब भूख से मैं तड़पता हूं....

गोद में उठकर अपने बच्चे को,
जब माँ-बाप लाड लडाते है,

देख कर उस बच्चे का बचपन,
मैं फूट-फूट के रो देता हूं....

आँसू ना कोई मेरे पोछने वाला,,
ना ही कोई गले से मुझे लगाता है,

रोते हुए पेड़ों से लिपट कर,
मैं दर्द अपना उन्हें सुनाता हूं....

इद, दिवाली का त्योहार जब,
लोग खुशी-खुशी मनाते है,

देख कर उनकी खुशहाली को,
मैं खुशियों के लिए तरसता हूं....

ऋत बदले मौसम बदलते,
रोज दिन यूँही गुजर जाता है,

लोग तो अपने घर चले जाते,
मैं वहीं का वहीं रहे जाता हूं....

सुबह से शाम भीख माँगते ही,
दिन मेरा बित जाता है,

काश कोई मिल मुझे भी अपना,
इस उम्मीद में फिर सो जाता हू....

ना धुतकारो तुम मुझे,
आखिर मैं भी तो एक इंसान हूं....

माँ-बाप का कोई पता नहीं,
शायद इस लिए मैं अनाथ हूं....

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दोस्तों बस एक गुजारिश है आपसे

कंही ऐसे बच्चों को आप देखो तो उनका सहारा जरूर बनना
सँवार जाए उनका भी बचपन ऐसा काम आप जरूर करना




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1 More responses

  • Jyoti
    Jyoti (Registered Member)
    Commented on 12-October-2017

    Nice poem.

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