Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

नदी नहाए

0
23 -Jun-2018 nil Nature Poem 0 Comments  520 Views
नदी नहाए

चलो चलें घर से निकले
गीत ग़ज़ल दोहा रच लें

बाहर जयों ही कदम रखा
बचपन का मिल गया सख
,"चलो चलें नदी किना रे
कूद नहाए नदी मझारे "
नव नूतन अनुभव लिख लें

कल कल कल बहती धारा
समझो कर रही इशारा
कभी नहीं थमना जाना
उसको ही जीवन माना
हम भी चरैवेति चुनलें...

तट पर हो सैर सपाटा
खाने को पुरी पराटा
खेलकूद हो मनमाना
अधरों पर मधुर तराना
हसी खुशी से मन भरलें...
(भरूच:०२.०६.२०१८)



Dedicated to
सभी बल्सहित्य्कार

Dedication Summary
प्रेरित करेगी

 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017