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नफरत पे मुहब्बत भारी है

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13 -Mar-2019 mannu bhai Dream Poems 0 Comments  53 Views
mannu bhai

*नफरत पे मुहब्बत भारी है*

तेरी उल्फत के साये में, ना जाने कब उम्र बीत गई।
हम प्रेम सागर में डूबे रहे, नफरत तुम्हारी जीत गई।

खंजर उतारा सीने मे, तेरी रुसवाई का भान हुआ।
रक्त तो निकला सीने से पर, इश्क लहुलुहान हुआ।

तेरे प्रणय-अम्बर साये में,मेरे प्रेम का स्थान नही।
चूमने दे उस खंजर को, फिर कोई अरमान नहीं।

आसन्न जर प्रतीत हुआ, इश्क भी जुआ है।
प्रसन्न्ं रहे सदा चित तेरा, लब पे बस ये दुआ है।

रुक्शत जो हो जाये तुमसे, लोचन कभी नम ना हो।
प्रणय गरल हम पी गये, नफरत तुम्हारी कम ना हो।

जग को भी मालूम चले, मुहब्बत कितनी प्यारी है।
लाख चला दे खंजर पर, नफरत पे मुहब्बत भारी है।

मनोज कुमार पुरोहित,अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल)



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