Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

नर से नारायण का सफर

0
12 -Mar-2019 mannu bhai Miscellaneous Poems 0 Comments  56 Views
mannu bhai

नर से नारायण का सफर


कोटि वैभव त्रूटी लघु, जे नर पाये आंच।
अतिशीघ्र उर क्रोधित कर,जीवन का यह सांच।

सांच लगे बडा विषैल, क्षण भर उर न भाये।
जे गरल धरे कण्ठ माहि, नीलकंठ कहलाये।

नमन करे जग ताहि के, चरण झुकाये शीश।
प्रेम सरिता प्रवाह कर, नर से बनो सतीश।

अमर हुवे नर देवता, भामाशा या दीन।
स्मृति पटल पर छा गये,भले पंचतत्व विलीन।


मनोज कुमार पुरोहित, अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल)



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017