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नर से निशाचर

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06 -Oct-2021 Kumar Ashish Motivational Poems 0 Comments  46 Views
नर से निशाचर

नर जब नर से निशाचर बन जायेगा
तब रब भी अपना कहर दिखायेगा

प्रकृती प्रदत्य भोज्य छोड़ छोड़ के
ब्रम्ह बतलाये भोज्य जब न खायेगा
कुत्ता, बिल्ली, बिच्छू से लेकर के
गधा, घोडा औ मगरमच्छ खायेगा

नर जब नर से निशाचर बन जायेगा
तब रब भी अपना कहर दिखायेगा

प्रकाश भी होगा प्रमान भी होगा
पर नभ अंधकार सा छा जायेगा
दृष्टि भी होंगी दिशा भी होंगी
पर पथ कहीं भी नजर न आयेगा

नर जब नर से निशाचर बन जायेगा
तब रब भी अपना कहर दिखायेगा

चाँद भी चाँदनी भी होगी
अम्बर तारे भी दिख जायेगे
निशा भरेगी आँखों मे जब
जग मंजर तब दिख जायेगे

नर जब नर से निशाचर बन जायेगा
तब रब भी अपना कहर दिखायेगा



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