Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

ये समय की कैसी आहट है

0
01 -Jun-2021 Hanuman Gope Natural Disasters Poems 0 Comments  187 Views
ये समय की कैसी आहट है

ये समय की कैसी आहट है, हर ओर बस घबराहट है। हवा में जहर का कोई कतरा है, सांस लेने मे भी बहुत खतरा है। हर तरफ इक अजीब सी खामोशी है , चुप हैं सब और थोड़ी सरगोशी है। लोग हर उम्र के रोज़ मर रहे, जो ज़िंदा हैं खौफ मे हैं और डर र

महामारी

0
09 -May-2021 Devendra Chandrol Natural Disasters Poems 0 Comments  379 Views
महामारी

एक त्रासदी एक बीमारी जिससे भयभीत दुनिया सारी जिसका नाम है Corona महामारी इसकी नहीं है किसी से नाते रिश्तेदारी अगर हमने सावधानी नहीं बरती तो आज है मेरी तो कल तुम्हारी बारी, घरों से उठती चत्कारें श्मशानों से उठता धुं

कोरोना काल में वियाह

0
22 -Mar-2021 सिद्धार्थ पांडेय Natural Disasters Poems 0 Comments  362 Views
कोरोना काल में वियाह

एहि महीना में वियाह रहल और मन में कल्पना अथाह रहल। चढ़ि जयति डोली जल्दी तेल्हई के बस इहे चाह रहल। आइल कोरोना सब चौपट कइले सगरो सपना अब टूट गइल, सोच के ई पगलाइल तेल्हई अंखिया में धारा के प्रवाह रहल। चढ़ि जयति डोली जल्

ऐ करोना ये तूने क्या कर दिया

1
04 -Jun-2020 Harpreet Ambalvee Natural Disasters Poems 0 Comments  1,105 Views
ऐ करोना ये तूने क्या कर दिया

ऐ करोना यह तूने क्या कर दिया कल तक आजाद था जो इंसान इस दुनिया का, आज पल भर में तूने घरों में कैद कर दिया , ऐ करोना यह तूने क्या कर दिया । महामारी बन कर तू ने पूरी दुनिया को डराया, खुद को भगवान समझने वाले देशों को घुटनों

ख़ौफ़ और ज़िंदगी

0
16 -May-2020 श्याम'कवि' बैरागी Natural Disasters Poems 0 Comments  1,050 Views
ख़ौफ़ और ज़िंदगी

"ख़ौफ़ और ज़िंदगी" ये अलस्सुबह से ही क्यों,शामें ढलने लगी हैं, ख़ौफ़ में अब,रूहें भी लिबास बदलने लगी हैं आकर सड़कों पर, अब सफर जम गया है, रास्ते थम गए हैं, अब मंजिलें चलने लगी हैं। मानो ठहर गया है वक़्त भी अपने ही घर में, फिजाए

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017