Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Dukhad Traasdi kiska Dosh?

1
25 -Nov-2013 Jaijairam Anand Natural Disasters Poems 1 Comments  1,665 Views
Jaijairam Anand

दुखद त्रासदी के लिए ,मढ़े प्रकृति सिर दोष
भूल न अपनी मानते ,लीला उसका कोष

अंधाधुंध विकास ने ,खोले बिपदा द्वार
प्रकृति नाती ने हार कर ,ड़ाल दिए हथियार

बाँध और झीलें बनी ,सभी दानवाकार
घन -बिस्फोटन के लिए ,बनती हैं आधार

वन पर्वत सरिता हुईं ,तन मन से लाचार
घोर प्रदूषण की सहें , बोलो कैसे मार

सकल वनस्पति तंत्र में ,लगा चुके हम आग
बोलो कैसे गायेगी ,प्रकृति बिचारी फाग

प्रकृति साथ हम कर रहे ,आये दिन खिडबाद
कांक्री ट जंगल उगे ,बैठे उनकी आड़

पर्यावरण बिनाश का ,हमने बोया बीज
सह्न शक्ति अब ना रही ,आती उसको खीझ

पर्यावरण बिनाश की ,बाढ़ प्रलय हैं पीर
रोदन अब थमता नहीं ,बहता खारा नीर

जितनी भी परियोजना ,सभी लाभ के दांव
सीधे सरल विकास के ,उखड गए हैं पाँव

पर्यावरण बिनाश की ,सुनी नहीं यदि टेर
महाप्रलय मूंह बाएगी ,भले लगे कुछ देर



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

1 More responses

  • poemocean logo
    KALYAN SINGH CHOUHAN (Guest)
    Commented on 18-February-2014

    I like your peom on kedarnath treasdy.

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017