Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Sabak

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03 -May-2015 kapil garg Natural Disasters Poems 0 Comments  1,706 Views
kapil garg

नेपाल के लोगो की भगवान रक्षा करे।।
हम सब के लिए शायद एक सबक

ऐ खुदा हम तुझे हर रोज नुकसान पहुचाते रहे, तू माफ करता रहा
ना दे अब तू इतनी बड़ी सजा, गलती दुबारा ना होगी ऐसी वादा रहा
हम ना समझ पाए कीमत उन पेड़ पौधों की,
जो अपना सब कुछ हम पर लुटाता रहा
ये इन्सान उसे ही काटता रहा
अपने साधन बढ़ाने को,इन्सान नये नये प्रयास करते रहा
गुमान हो गया उसे, वो खुद को तुझसे बड़ा समझता रहा
अपने सुखो की चिंता में, वो नदियों का भी हक छीन रहा है
बहना चाहिए था जहा नदियों को, वहा आज इन्सान रह रहा है
मालूम है खुदा,
इन्सान जाने अंजाने कुदरत से खेल रहा है
हाँ मानने लग गया था, खुद को तुझसे भी बड़ा,
पर सर झुका के, हर गलती की माफी मांग रहा है
ये स्रष्टि तेरा ही घर है, इसे क्यों तू यु तबाह कर रहा है
इन्सान तेरे चरणों में अपनी प्राणों की भीख मांग रहा है
~कपिल गर्ग



Dedicated to
people of nepal

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