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Uttrakhand Mein Pralaya

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Uttrakhand Mein Pralaya: This long hindi poem is on Kedarnath, Uttrakhand landslide disaster or pralaya happened in 2013. A lots of people lost their lives in this disaster or pralaya. This poem is an tribute to Kedarnath, Uttrakhand tragedy or pralaya.

30 -Jun-2013 Praveen Rawat Natural Disasters Poems 15 Comments  21,865 Views
Praveen Rawat

1) ना जाने क्यों बरस पड़े,
वो इन्द्र देव इन पहाड़ो पर|
नष्ट हुआ हर ज़रा-ज़रा,
दरार पड़ी दीवारों पर ||


देख इस जल का जलजला ,
बिजली कौंध पड़ी नजारो पर |
छोड़ गया इस बर्बादी को,
वो न जाने किन सहारों पर ||



राहत सामग्री की जगह देखो,
नेता आए जहाजों पर |
नीचे का मंजर देखा तो ,
लाशें पड़ी थी दरवाजो पर ||



सदा भरी रहने वाली घाटी मैं ,आज
न कोई रस्ते पे था,न चौराहों पर |
आगे कुवां था तो पीछे खाई|
भक्त खड़े थे दोराहों पर ||



तब हरित वस्त्र में देव आये ,
बचाए लोग हजारों पर |
देश के नेता खेद जताने ,
आये थे जहाजों पर ||




२) उत्तराखंड में प्रलय का ,
न जाने ये कैसा मंजर था |
पर्वत सारे टूट गए,
बस चारो और समंदर था ||



उन भक्तों की व्यथा क्या समझु ,
मैं तो घर के अन्दर था |
मेरे चारो और भोग विलास ,
पर उनके सामने तबाही का मंजर था ||



कहीं सड़क,तो कहीं घर नष्ट हुए,
और बस आगे बढता जल बवंडर था |
रात के इस प्रकोप मैं ,
बचा वही जो मंदिर के अन्दर था ||



नेता आये खेद जताने, पर
हमें पता था क्या उनके अन्दर था |
पर पांच साल के ये इद का चाँद,
आज भी जहाज के अन्दर था ||



बचाने आये वो शरहद वीर,
देशभक्त जिनके अन्दर था |
उनके लिए तो क्या सुख-दुःख,
सब एक सा मंजर था ||

3) हे इश्वर क्या माया तेरी,
काल रूप सी छाया तेरी |
इन बड़े बड़े पहाड़ो को,
सदा डसेगी ये काया तेरी ||



लगता कोई पापी आया जो,
भूल गया त्रिनेत्र की माया तेरी |
तभी तो कोई मदिरा तो कोई मॉस,
गली मैं लाया तेरी ||



हे इश्वर माफ़ करना जो भूल हुई,
हम तो है बस छाया तेरी |
ऐसा प्रकोप फिर न दिखाना,
देखनी है बस भोले सी काया तेरी ||

Uttrakhand Mein Pralaya


Dedicated to
to all those people who lost their life and wealth in uttrakhand's disaster

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15 More responses

  • poemocean logo
    Ankit singh (Guest)
    Commented on 13-October-2016

    I don't have words to say...and nice is not enough for it....I loved it....and prya for those people.....

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    Samiksha Patil (Guest)
    Commented on 05-June-2015

    Vry nyc poem... !Keep it up!.

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    Mukul tyagi (Guest)
    Commented on 28-May-2015

    greaaaatttttt.

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    Mukul tyagi (Guest)
    Commented on 28-May-2015

    mast ...gud poem sir....

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    Priyanka (Guest)
    Commented on 26-May-2015

    Awesummmm.... poem.

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    Priyanka chauhan (Guest)
    Commented on 26-May-2015

    hmse bhool na hue hoti.......
    To y sayd dard bhara manzar na dekhna padta........

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    Sapna (Guest)
    Commented on 17-August-2013

    so real and painful..

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    Ravinder (Guest)
    Commented on 17-July-2013

    sachi aur achi kavita....... puri sachai hai isme.

  • Praveen Rawat
    Praveen Rawat (Registered Member)
    Commented on 07-July-2013

    dhanyavad sunil bhai.

  • Sunil Kumarr
    Sunil Kumarr (Registered Member)
    Commented on 07-July-2013

    ek ek sachchaai ko bakhubi shabdon mein piroya hai.

    mast kavita hai. I like it..

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