Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

इंद्र धुनुष के सात रंग

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27 -Jun-2022 Harjeet Nishad Nature Poem 0 Comments  113 Views
इंद्र धुनुष के सात रंग

इंद्र धनुष के सात रंग हैं लाल नारंगी पीला। हरा जामुनी बैगनी साथ में है रंग नीला। जल की बूंदें झर झर झरती पीछे सूर्य चमकता। लाल है ऊपर नीला रंग है सबसे नीचे रहता। आसमान में लुढ़काया यह किसने रंग का प्याला। सूरज का

सृष्टि की लीला

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07 -Feb-2022 Ravi Nature Poem 0 Comments  395 Views
सृष्टि की लीला

जहॉं डाल-डाल पर खिला फूल, अपनी सौन्दर्यों से सबको लुभा रहा। वहीं दूर झूमता काले मतवाले भौंरे, इसकी रमणीयता से बेकाबू हो रहा। देखते ही देखते भौंरे फूलों के पास पहुॅंचा। पहले मंडरा कर फूलों का विश्वास जीता। फिर गु

मैं मनुष्य का

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13 -Jan-2022 Mahesh Joshi Nature Poem 0 Comments  160 Views
मैं मनुष्य का

अडिग अमिट मै साहसी प्रचंड घोर प्राकृमि मिटा सका नही मुझे झुका सका नही मुझे देखो सफ़र के धीर राह को रात के प्रमाद को सैनिक के वो मिसाल को मंत्र सा वह तार को भानु के प्रताप मै शीत के प्रहार मै अंकुश लगा सका हु प्राकृ

मेघ पुष्प और मनुज की वार्तालाप

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21 -Nov-2021 Karan Kumar Nature Poem 0 Comments  376 Views
मेघ पुष्प और मनुज की वार्तालाप

आज तू विकल नहीं है मेरे लिए क्योंकि मैं विद्यमान हूं इस बेला में सतत करता है अनुपयुक्त व्यवहार इक वासर विलापित होगा तू इसके लिए मत कर इसके साथ तू अनुपयुक्त व्यवहार नहीं तो तुझसे प्रमान इतना परे हो जाएगा या फिर तु

रोला छंद "शाम'

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07 -Jul-2021 Naman Nature Poem 0 Comments  907 Views
रोला छंद

रोला छंद रवि को छिपता देख, शाम ने ली अँगड़ाई। रक्ताम्बर को धार, गगन में सजधज आई।। नृत्य करे उन्मुक्त, तपन को देत विदाई। गा कर स्वागत गीत, करे रजनी अगुवाई।। सांध्य-जलद हो लाल, नृत्य की ताल मिलाए। उमड़-घुमड़ कर मेघ, छटा म

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