Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

सृष्टि की लीला

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07 -Feb-2022 Ravi Nature Poem 0 Comments  304 Views
सृष्टि की लीला

जहॉं डाल-डाल पर खिला फूल, अपनी सौन्दर्यों से सबको लुभा रहा। वहीं दूर झूमता काले मतवाले भौंरे, इसकी रमणीयता से बेकाबू हो रहा। देखते ही देखते भौंरे फूलों के पास पहुॅंचा। पहले मंडरा कर फूलों का विश्वास जीता। फिर गु

मैं मनुष्य का

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13 -Jan-2022 Mahesh Joshi Nature Poem 0 Comments  112 Views
मैं मनुष्य का

अडिग अमिट मै साहसी प्रचंड घोर प्राकृमि मिटा सका नही मुझे झुका सका नही मुझे देखो सफ़र के धीर राह को रात के प्रमाद को सैनिक के वो मिसाल को मंत्र सा वह तार को भानु के प्रताप मै शीत के प्रहार मै अंकुश लगा सका हु प्राकृ

मेघ पुष्प और मनुज की वार्तालाप

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21 -Nov-2021 Karan Kumar Nature Poem 0 Comments  256 Views
मेघ पुष्प और मनुज की वार्तालाप

आज तू विकल नहीं है मेरे लिए क्योंकि मैं विद्यमान हूं इस बेला में सतत करता है अनुपयुक्त व्यवहार इक वासर विलापित होगा तू इसके लिए मत कर इसके साथ तू अनुपयुक्त व्यवहार नहीं तो तुझसे प्रमान इतना परे हो जाएगा या फिर तु

रोला छंद "शाम'

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07 -Jul-2021 Naman Nature Poem 0 Comments  740 Views
रोला छंद

रोला छंद रवि को छिपता देख, शाम ने ली अँगड़ाई। रक्ताम्बर को धार, गगन में सजधज आई।। नृत्य करे उन्मुक्त, तपन को देत विदाई। गा कर स्वागत गीत, करे रजनी अगुवाई।। सांध्य-जलद हो लाल, नृत्य की ताल मिलाए। उमड़-घुमड़ कर मेघ, छटा म

--------:"वृक्षारोपण":--------

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16 -Jun-2021 BABUL KUMAR SINGH Nature Poem 0 Comments  954 Views
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आओ मिलकर पेड़ लगाए, पर्यावरण को स्वच्छ बनाए। यह सन्देशा सब तक पहुंचाए, आओ मिलकर पेड़ लगाए। खुद भी पेड़ लगाना है और, लोगों से भी लगवाना है। एकजूट हो कर हम सबको, सोया समाज जगाना है। हम मिलकर ऐसा कदम उठाए, जिससे ज्यादा पेड़

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