Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Suraj ki kiranen aain.

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17 -Aug-2019 Harjeet Nishad Nature Poem 0 Comments  204 Views
Suraj ki kiranen aain.

Suraj ki kiranen aain. Lalai asman men chhai. Chahak uthi nanhin gauraiya, Hava bahi sunder sukhdai. Kaliyon nen ankhen kholi. Kuhu kuhu kuhu koyal boli. Hava bahi sheetal man bhavan, Pedon ki shakhayen dolin. Chidiyon ka jhund hai nikala. Purab se pashchim ko chala. Pankh pasare udate sare, Sang sang udana lagata bhala. Sone jaisi suraj ki lali. Hai sabako sukh dene vali. Phulon ko hain ye chmakati , Kiranen lagati ajab nirali. Suraj aker subah jagata. Chahun or lali failata. Sare divas tapaker khud ko, Sar jag roshan ker jata.

रात के आंगन में देखो

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13 -Jul-2019 Mukesh Kamti Nature Poem 0 Comments  232 Views
रात के आंगन में देखो

रात के आंगन में देखो कितने तारे टिमटिमाते मस्त मौला पवन आसमान को महकाए आओ आओ मिलकर कुछ अनोखा गुनगुनाए रात के आंगन में देखो कितने तारे टिमटिमाते चांद की चांदनी से अंबर के आंगन में बादलों की काली घटा आपस में शोर मच

माटी भी तो माँ है

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10 -Nov-2018 Rajesh Nature Poem 0 Comments  392 Views
माटी भी तो माँ है

माटी भी तो माँ है माटी भी तो माँ है , माटी से ही हमारा वजूद है, माटी से हमारी पहचान है । सौंधी- सौंधी खुशबू इससे है आती, जब मेघ बूंदे इससे टकराती, धरतीपुत्र इस पर हैं हल चलाते, बदले में यह सोना उगाती। लहलाहतीं फसलें इस

Naagfani

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30 -Sep-2018 Ravi Nature Poem 0 Comments  434 Views
Naagfani

नागफनी,कहीं भली है हर किसी दूसरे फूल-पौधे से, सबसे अलग, सुरक्षित, सुन्दर व आकर्षक । हो कहीं हरे भरे चमन में, या किसी रेगिस्तान में, हर पल, हर जगह , रहती है एक सी, हर मौसम, हर परिस्थिति में, वैसी की वैसी। न खिलने के लिए बहा

कुदरत का दोहन

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28 -Jun-2018 Suresh Chandra Sarwahara Nature Poem 0 Comments  760 Views
कुदरत का दोहन

हरे पेड़ पर चली कुल्हाड़ी धूप रही ना याद, मूल्य समय का जाना हमने खो देने के बाद। खूब फसल खेतों से ले ली डाल डाल कर खाद, पैसों के लालच में कर दी उर्वरता बर्बाद। दूर दूर तक बसी बस्तियाँ नगर हुए आबाद, बन्द हुआ अब तो जंगल

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