Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

रोला छंद "शाम'

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07 -Jul-2021 Naman Nature Poem 0 Comments  430 Views
रोला छंद

रोला छंद रवि को छिपता देख, शाम ने ली अँगड़ाई। रक्ताम्बर को धार, गगन में सजधज आई।। नृत्य करे उन्मुक्त, तपन को देत विदाई। गा कर स्वागत गीत, करे रजनी अगुवाई।। सांध्य-जलद हो लाल, नृत्य की ताल मिलाए। उमड़-घुमड़ कर मेघ, छटा म

--------:"वृक्षारोपण":--------

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16 -Jun-2021 BABUL KUMAR SINGH Nature Poem 0 Comments  733 Views
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आओ मिलकर पेड़ लगाए, पर्यावरण को स्वच्छ बनाए। यह सन्देशा सब तक पहुंचाए, आओ मिलकर पेड़ लगाए। खुद भी पेड़ लगाना है और, लोगों से भी लगवाना है। एकजूट हो कर हम सबको, सोया समाज जगाना है। हम मिलकर ऐसा कदम उठाए, जिससे ज्यादा पेड़

हे नाथ!

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25 -May-2021 Aarna Singh Nature Poem 0 Comments  137 Views
हे नाथ!

हे नाथ तू कैसी परीक्षा, आज हमसे ले रहा, हो गये हैं सभी कैदी,हवा भी न ले पा रहा। नाक,मुहं पर हैं अब परदे, दूर दो गज हो रहा, भेजी कैसी ये बीमारी,उपचार भी‌ न हो रहा।। त्रिदेव अब तो दया कर दो,यमरा़ज को बिश्राम दे दो, हो रही बी

मधुमती छंद "मधुवन महके"

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14 -May-2021 Naman Nature Poem 0 Comments  321 Views
मधुमती छंद

(मधुमती छंद) मधुवन महके। शुक पिक चहके।। जन-मन सरसे। मधु रस बरसे।। ब्रज-रज उजली। कलि कलि मचली।। गलि गलि सुर है। गिरधर उर है।। नयन सजल हैं। वयन विकल हैं।। हृदय उमड़ता। मति मँह जड़ता।। अति अघकर मैं। तव पग पर मैं।। प्रभु

इन्ही पेड़ो ने

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25 -Apr-2021 सिद्धार्थ पांडेय Nature Poem 0 Comments  319 Views
इन्ही पेड़ो ने

ये जो पेड़ों को काटकर, तुमने अपना बेड बनाया है। ये बदला है क्या पेड़ों का? जो बेड पर लिटाया है। बिन आक्सीजन के बेजान सा हुआ है तूँ इन्ही पेड़ों ने देखो क्या तुम्हे दिन दिखलाया है। तुम्हे जरूरत पड़ी तो इनकी टहनी को छाँट

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