Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

माटी भी तो माँ है

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10 -Nov-2018 Rajesh Nature Poem 0 Comments  69 Views
माटी भी तो माँ है

माटी भी तो माँ है माटी भी तो माँ है , माटी से ही हमारा वजूद है, माटी से हमारी पहचान है । सौंधी- सौंधी खुशबू इससे है आती, जब मेघ बूंदे इससे टकराती, धरतीपुत्र इस पर हैं हल चलाते, बदले में यह सोना उगाती। लहलाहतीं फसलें इस

Naagfani

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30 -Sep-2018 Ravi Nature Poem 0 Comments  94 Views
Naagfani

नागफनी,कहीं भली है हर किसी दूसरे फूल-पौधे से, सबसे अलग, सुरक्षित, सुन्दर व आकर्षक । हो कहीं हरे भरे चमन में, या किसी रेगिस्तान में, हर पल, हर जगह , रहती है एक सी, हर मौसम, हर परिस्थिति में, वैसी की वैसी। न खिलने के लिए बहा

कुदरत का दोहन

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28 -Jun-2018 Suresh Chandra Sarwahara Nature Poem 0 Comments  370 Views
कुदरत का दोहन

हरे पेड़ पर चली कुल्हाड़ी धूप रही ना याद, मूल्य समय का जाना हमने खो देने के बाद। खूब फसल खेतों से ले ली डाल डाल कर खाद, पैसों के लालच में कर दी उर्वरता बर्बाद। दूर दूर तक बसी बस्तियाँ नगर हुए आबाद, बन्द हुआ अब तो जंगल

Maati se Juda jo naata

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28 -Jun-2018 Pragya Sankhala Nature Poem 0 Comments  258 Views
Maati se Juda jo naata

Maati se Juda jo naata Bachpan ki wo yaad dilata Sodhi sondhi iss Maati me Roj sham ko khelte the Nanhe Nanhe hoto se Khilone ham banate the Pani ka Jag Sath me lekar Ghanto tak khelte the Geeli Geeli mitti se Khudh lath path ho jate the Jab bhi moka milta tha Khelne ham lag jate the Thandi thandi mitti me Tahlte ham rahte the Khusiyo ke Chote pal bhi ham Usme dhudh liya karte the

हमारी प्रकृति का सम्मान

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25 -Jun-2018 सुमित.शीतल Nature Poem 0 Comments  228 Views
हमारी प्रकृति का सम्मान

अब और रूकू व सहूं ये है नामुमकिन, दिल नही करता कि अब मैं चुप रहू। हिम्मत तो अब करनी पड़ेगी, जो बचाना है प्रकृति को तो पेड़-पौधो की रक्षा करनी होगी। सीने में दबा अब ये लावा फूट कर रहेगा, प्रकृति का और अपमान अब सहन ना हो

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