Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मैं मनुष्य का

0
13 -Jan-2022 Mahesh Joshi Nature Poem 0 Comments  42 Views
मैं मनुष्य का

अडिग अमिट मै साहसी प्रचंड घोर प्राकृमि मिटा सका नही मुझे झुका सका नही मुझे देखो सफ़र के धीर राह को रात के प्रमाद को सैनिक के वो मिसाल को मंत्र सा वह तार को भानु के प्रताप मै शीत के प्रहार मै अंकुश लगा सका हु प्राकृ

मेघ पुष्प और मनुज की वार्तालाप

0
21 -Nov-2021 Karan Kumar Nature Poem 0 Comments  112 Views
मेघ पुष्प और मनुज की वार्तालाप

आज तू विकल नहीं है मेरे लिए क्योंकि मैं विद्यमान हूं इस बेला में सतत करता है अनुपयुक्त व्यवहार इक वासर विलापित होगा तू इसके लिए मत कर इसके साथ तू अनुपयुक्त व्यवहार नहीं तो तुझसे प्रमान इतना परे हो जाएगा या फिर तु

रोला छंद "शाम'

2
07 -Jul-2021 Naman Nature Poem 0 Comments  557 Views
रोला छंद

रोला छंद रवि को छिपता देख, शाम ने ली अँगड़ाई। रक्ताम्बर को धार, गगन में सजधज आई।। नृत्य करे उन्मुक्त, तपन को देत विदाई। गा कर स्वागत गीत, करे रजनी अगुवाई।। सांध्य-जलद हो लाल, नृत्य की ताल मिलाए। उमड़-घुमड़ कर मेघ, छटा म

--------:"वृक्षारोपण":--------

0
16 -Jun-2021 BABUL KUMAR SINGH Nature Poem 0 Comments  839 Views
--------:

आओ मिलकर पेड़ लगाए, पर्यावरण को स्वच्छ बनाए। यह सन्देशा सब तक पहुंचाए, आओ मिलकर पेड़ लगाए। खुद भी पेड़ लगाना है और, लोगों से भी लगवाना है। एकजूट हो कर हम सबको, सोया समाज जगाना है। हम मिलकर ऐसा कदम उठाए, जिससे ज्यादा पेड़

हे नाथ!

0
25 -May-2021 Aarna Singh Nature Poem 0 Comments  207 Views
हे नाथ!

हे नाथ तू कैसी परीक्षा, आज हमसे ले रहा, हो गये हैं सभी कैदी,हवा भी न ले पा रहा। नाक,मुहं पर हैं अब परदे, दूर दो गज हो रहा, भेजी कैसी ये बीमारी,उपचार भी‌ न हो रहा।। त्रिदेव अब तो दया कर दो,यमरा़ज को बिश्राम दे दो, हो रही बी

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017