Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

कुछ क्षण प्रकृति से जुड़ कर देख लो

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02 -Feb-2021 Dr. Archana Tirkey Nature Poem 2 Comments  399 Views
कुछ क्षण प्रकृति से जुड़ कर देख लो

दूर सागर से आर्द्र हवा आई है उमड़- घुमड़ कर आए काले बादल बरखा रिमझिम -रिमझिम स्नेह बूँदें बरसा रही धरा के कण -कण को सींचती नव जीवन का संचार कर रही मेघ आच्छादित नभ को दृष्टि उठा कर देख लो कुछ क्षण प्रकृति से जुड़ कर देख ल

हाइकु

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23 -Jan-2021 Dr Sushil sharma Nature Poem 0 Comments  71 Views
हाइकु

हाइकु डॉ सुशील शर्मा सर्जना क्षण तपस्या मयी त्वरा नव निर्माण। चिर अखंड स्वयंभू अहंकार बौना आदमी। नदी के द्वीप बहते अंतरीप नियति क्रोड़। फूस छप्पर अल्हड़ लहरन गाँव सुगंध। देह सुगंध वासनाओं के सर्प घोर तमस।

सुजान छंद (पर्यावरण)

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12 -Dec-2020 Naman Nature Poem 0 Comments  220 Views
सुजान छंद (पर्यावरण)

सुजान छंद (पर्यावरण) पर्यावरण खराब हुआ, यह नहिं संयोग। मानव का खुद का ही है, निर्मित ये रोग।। अंधाधुंध विकास नहीं, आया है रास। शुद्ध हवा, जल का इससे, होय रहा ह्रास।। यंत्र-धूम्र विकराल हुआ, छाया चहुँ ओर। बढ़ते जाते वा

Ye Sham Mastani

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10 -Dec-2020 Ashok Bhinde Nature Poem 0 Comments  194 Views
Ye Sham Mastani

ठंडी ठंडी वाली शाम में सूरज को ढलते देखा है सूरज के हल्के छाये में पंछियों को उड़ते देखा है हरे भरे मैदानों में गायों को चरते देखा है इस आसमान में वापस पंछियों को घर जाते देखा है इस ठंडी शाम में लोगो को बाहर घूमते

" की अब हमे..... अपने ही घर में डर लगता हैं "

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28 -Aug-2020 jagmohan jetha Nature Poem 0 Comments  440 Views

चले थे चांद पर घर बनाने कुदरत ने किया ऐसा कहर की अब हमे..... अपने ही घर में डर लगता है ! अपनों* को कुचल कर चलना आदत बन गई थी हमारी दगाबाजी बन गई थी फीदरत हमारी अब खुद के कर्मो का ही यह खंजर लगता हैं की अब हमे ..... अपने ही घर मे

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