Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

" की अब हमे..... अपने ही घर में डर लगता हैं "

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28 -Aug-2020 jagmohan jetha Nature Poem 0 Comments  108 Views

चले थे चांद पर घर बनाने कुदरत ने किया ऐसा कहर की अब हमे..... अपने ही घर में डर लगता है ! अपनों* को कुचल कर चलना आदत बन गई थी हमारी दगाबाजी बन गई थी फीदरत हमारी अब खुद के कर्मो का ही यह खंजर लगता हैं की अब हमे ..... अपने ही घर मे

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस

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27 -Jul-2020 Dr. Swati Gupta Nature Poem 0 Comments  192 Views
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विशेष- "वृक्षों की सुन लो करुण पुकार, करो न उन पर अत्याचार, न काटो स्वार्थवश उनको यूँ, चहुंओर मच जाएगी हाहाकार, अनायास काटते जब उनको, पीड़ा होती है उन्हें भी अपार, मीठे फल,सब्जी और अन्न द

सावन में भीग आते हैं।

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22 -Jul-2020 Dr. Swati Gupta Nature Poem 0 Comments  279 Views
सावन में भीग आते हैं।

चलो एक बार फिर से हम सावन में भीग आते हैं, रिमझिम रिमझिम बारिश में अपने मन को लुभाते हैं। छायी है काली बदरी और मौसम भी है आशियाना, हरियाली फैली है चारों ओर, पेड़ भी गुनगुनाते हैं। कूं कूं करती कोयल प्यारी,गीत गा रहे प

दोपहर

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31 -May-2020 Anand kumar (Manish) Nature Poem 0 Comments  99 Views
दोपहर

दोपहर की बेला में हम सब गए आम गाछ के नीचे किसी ने चद्दर तान लिया तो कोई खटिया खींचे गाछ के नीचे लगा बिछौना सब बुद्धि जीवी लेट गए जिसको-जिसको जगह न मिली वो गाछ के नीचे ही बैठ गए इस आस में बैठे थे कि कोई अपना बिस्तर छोड

दुनिया को बचा ले

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28 -Apr-2020 Harjeet Nishad Nature Poem 0 Comments  170 Views
दुनिया को बचा ले

पावों में चलते चलते अब पड़ गए हैं छाले। सुनले पुकार इनकी ऐ दुनिया के रखवाले। ज़ालिम करोना इतना अब कहर ढा रहा है। चाबुक ये मौत वाला सब पर चला रहा है। इनके मुंहों से छीने गर्दिशों ने हर निवाले। सुन ले पुकार इनकी ऐ दु

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