Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Ye Sham Mastani

1
10 -Dec-2020 Ashok Bhinde Nature Poem 0 Comments  358 Views
Ye Sham Mastani

ठंडी ठंडी वाली शाम में सूरज को ढलते देखा है सूरज के हल्के छाये में पंछियों को उड़ते देखा है हरे भरे मैदानों में गायों को चरते देखा है इस आसमान में वापस पंछियों को घर जाते देखा है इस ठंडी शाम में लोगो को बाहर घूमते

" की अब हमे..... अपने ही घर में डर लगता हैं "

0
28 -Aug-2020 jagmohan jetha Nature Poem 0 Comments  503 Views

चले थे चांद पर घर बनाने कुदरत ने किया ऐसा कहर की अब हमे..... अपने ही घर में डर लगता है ! अपनों* को कुचल कर चलना आदत बन गई थी हमारी दगाबाजी बन गई थी फीदरत हमारी अब खुद के कर्मो का ही यह खंजर लगता हैं की अब हमे ..... अपने ही घर मे

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस

0
27 -Jul-2020 Dr. Swati Gupta Nature Poem 0 Comments  282 Views
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विशेष- "वृक्षों की सुन लो करुण पुकार, करो न उन पर अत्याचार, न काटो स्वार्थवश उनको यूँ, चहुंओर मच जाएगी हाहाकार, अनायास काटते जब उनको, पीड़ा होती है उन्हें भी अपार, मीठे फल,सब्जी और अन्न द

सावन में भीग आते हैं।

0
22 -Jul-2020 Dr. Swati Gupta Nature Poem 0 Comments  648 Views
सावन में भीग आते हैं।

चलो एक बार फिर से हम सावन में भीग आते हैं, रिमझिम रिमझिम बारिश में अपने मन को लुभाते हैं। छायी है काली बदरी और मौसम भी है आशियाना, हरियाली फैली है चारों ओर, पेड़ भी गुनगुनाते हैं। कूं कूं करती कोयल प्यारी,गीत गा रहे प

दोपहर

0
31 -May-2020 Anand kumar (Manish) Nature Poem 0 Comments  194 Views
दोपहर

दोपहर की बेला में हम सब गए आम गाछ के नीचे किसी ने चद्दर तान लिया तो कोई खटिया खींचे गाछ के नीचे लगा बिछौना सब बुद्धि जीवी लेट गए जिसको-जिसको जगह न मिली वो गाछ के नीचे ही बैठ गए इस आस में बैठे थे कि कोई अपना बिस्तर छोड

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017