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Doob Kumari

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15 -Aug-2015 Dr. Pradeep Shukla Nature Poem 0 Comments  2,573 Views
Dr. Pradeep Shukla

नन्ही दूब ने आँखें खोली
चारों तरफ निहारा
आसमान से फिर छूटा है
पानी का फौआरा

तेज़ धूप से सूख गए थे
उसके सर के बाल
बारिश की बूंदों ने आकर
फिर से किया कमाल

दिन दूनी औ रात चौगुनी
बढ़ती गईं जटाएं
कुछ तो इतनी बढ़ी कि उनमें
चिड़िया भी छुप जाएँ

बूँदें रोज झूलतीं उन पर
खेलें छुपम छुपाई
खेल खेल में हो जाती है
उनमे हांथापाई

रोज शाम को मुन्ना मुन्नी
यहाँ खेलने आयें
दूब मखमली बड़े प्यार से
पैरों को सहलाये

एक बड़ी सी कैंची ले कर
आये माली काका
हाँथ फिराकर बड़े प्यार से
फिर आँखों में झाँका

बड़े हो गए बाल तुम्हारे
देखो दूब कुमारी
छोटे बाल अभी फ़ैशन में
कहती दुनिया सारी

अभी काटकर अच्छे ढ़ंग से
तुम्हे सवारेंगे
कटे बाल सब झोली भर कर
हम ले जायेंगे

सुन कर बातें माली की
बूँदों को गुस्सा आया
झड़ी लगा दी बारिश की
माली को तुरत भगाया.

Doob Kumari


Dedicated to
Cynodon dactylon

Dedication Summary
Cynodon dactylon (grass)

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