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Nanha Sa Paudha

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08 -Aug-2015 anuj bhargava Nature Poem 0 Comments  5,110 Views
anuj bhargava

छोटा सा पौधा

घर में रखा एक छोटा सा गमला
उसमें लगा एक नन्हा सा पौधा
खिले हुए कुछ फूल उसमें
ढेर लहलहाती पत्तियाँ जिसमे
हर सुबह हर शाम इंतज़ार करता
अपने माली बाबा का
माली आता , देख मुझे मुस्कुराता
उसकी मुस्कराहट को देख
अपना बदन फुलाता
बैठा रहता दिन भर प्यासा
आकर वो मेरी प्यास बुझाता
कभी न उसके आने पर
मैं कितना कुम्ह्ला जाता
व्याकुल होकर कुछ मेरी पत्तियाँ
मुरझाने लगती अपनी ही जड़ से
मैं उन्हें तरो ताजा कुछ कर पाता
फूल भी बिखरने लगते
कोशिश करता उन्हें संभालता
फिर याद करता घर के मालिक को
रोज देखता मुझको वह हर सुबह –शाम
कभी कभी मुस्कुरा भी देता
आज नज़र पड़ी उसकी मुझ पर
लगा वो थोड़ा घबराया
झट से वापस घर में जाकर
लुटिया में जल भर लाया
स्वयं जल छिड़कने का
जीवन में अहसास पाया
शर्म उसे महसूस हुई
अपने नन्हे से पौधे को
धोकर साफ़ किया
उसे क्या पता हम पौधे भी
स्वामी के स्पर्श को तरसते हैं
संचित होकर उसके प्रांगण को
हम ही सुगंधित करते हैं



Dedicated to
Dr NARENDAR DAGAR

Dedication Summary
DR NARENDRA DAGAR IS RETIRED FROM HAU, HISSAR & MAN OF AGRICULTURE / PARTICULARLY HORTICULTURE WORKED TOGETHER WITH ME IN IFFCO, IKSL, NEHRU PLACE, I HAVE LEARNT LOT FROM HIM APART FROM MY SUBJECT "METEOROLOGY" WE USED TO PREPARE WEATHER BASED AGRO ADVISORIES AFTER RETIREMENT FROM IMD

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