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'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में 4 प्रणय गीत

27 -Oct-2016 rameshraj Love Poem 0 Comments  330 Views

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में रमेशराज के 4 प्रणय गीत
'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत-1
जब वो बोले मिसरी घोले
मिसरी घोले हौले-हौले
हौले-हौले प्रिय मुसकाये
प्रिय मुसकाये मन को भाये
मन को भाये, मादक चितवन
मादक चितवन, अति चंचल मन
अति चंचल मन प्यार टटोले
प्यार टटोले जब वो बोले |

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत -2
वे मुसकाते तम में आये
तम में आये, भाव जगाये
भाव जगाये मिलन-प्रीति का
मिलन-प्रीति का, रति-सुनीति का
रति-सुनीति का, दीप जलाये
दीप जलाये हम मुसकाये |
'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत -3
" पल-पल उसकी चंचल आँखें
चंचल आँखें, बादल आँखें
आँखें हरिणी जैसी सुंदर
सुंदर-सुंदर संकेतों पर
संकेतों पर मन हो चंचल
मन हो चंचल, यारो पल-पल | "
(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत-4
" पल-पल उससे मिलने को मन
मिलने को मन, पागल-सा बन
पागल-सा बन, उसे पुकारे
उसे पुकारे, प्रियतम आ रे !
प्रियतम आ रे, तब आये कल
तब आये कल, जब हों रति-पल | "
(रमेशराज )
रमेशराज, 15/109, ईसानगर, अलीगढ-२०२००१

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