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नवोदय मे पढ़ा करते थे (Navodaya Wali Baatein)

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23 -Nov-2020 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  347 Views
PANKAJ CHOUREY

नवोदय मे पढ़ा करते थे
मस्त मगन रहा करते थे।
ना धूप की चिंता, ना कपड़ों का डर
हम तो मट्टी मे ही खेला करते थे।।

एक के पापा सब्जी बेचा करते थे
दूसरे के पापा रिक्शा चलाया करते थे।
हम ऐसे बच्चे थे
जो नवोदय मे पढ़ा करते थे।।

लोग ए फोर एप्पल बोला करते थे
हम गालियों मे महारथ हासिल किया करते थे।
हम ऐसे बच्चे थे
जो नवोदय मे पढ़ा करते थे।।

ना पास की फिक्र, ना फेल का डर
हम तो हर वर्ष उतीर्ण हो जाया करते थे।
हम मस्त मगन रहा करते थे
किसी से ना डरते थे।।

हुनर की पहचान हुई ,
जब हम कक्षा आठ मे पढ़ा करते थे।
हम नवोदय के लडके थे,
हुडदंग मचाया करते थे।।

गणित से था लगाव ऐसा जैसे माँ और बेटा,
सामाजिक कबही समझ ना आयी ।।
विज्ञान भी खूब भाव खाई,
परन्तु अंत मे हमारे पास ही आयी।।

कक्षा बदली, दिन बदले
कक्षा मे कच्ची कलियाँ भी आयी।
लडकियों के मामले मे थे शर्मिले,
हमसे ना एक भी पट पाई।।

सफर एक दिन यह खत्म हो गया,
नवोदय ना जाने कहाँ खो गया।
याद कर करके हँस लेता हूँ,
हँसते हँसते रो लेता हूँ।।

मैं यह लिखते लिखते रो गया,
बहुत से किस्सो को आँसुओं मे धो गया।
बस इतना जान लो,
नवोदय मे पढ़ते थे,
मस्त मगन रहा करते थे।।



Dedicated to
All Navodayans !

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